एनडीए में नौसेना और वायुसेना के लिए बीटेक क्यों है अनिवार्य? जानिए पढ़ाई और ट्रेनिंग का पूरा गणित करियर एक घंटा पहले 3
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में कैडेट्स को सैन्य ट्रेनिंग के साथ-साथ बीए, बीएससी और बीटेक की डिग्री भी पूरी करनी होती है, जो जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त होती है. जानिए तीनों सेनाओं के लिए कोर्स, डिग्री और योग्यता का पूरा ब्यौरा.

भारतीय सशस्त्र बलों में अफसर बनकर देश की सेवा करने का सपना देखने वाले हर युवा के लिए राष्ट्रीय रक्षा अकादमी एक बड़ा पड़ाव मानी जाती है. पुणे के खड़कवासला में स्थित यह अकादमी दुनिया की पहली ऐसी संस्था है, जहां थल सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों के कैडेट्स एक साथ ट्रेनिंग लेते हैं. एनडीए की परीक्षा पास कर जब युवा यहां पहुंचते हैं, तो आमतौर पर उनके मन में सिर्फ कड़ी मिलिट्री ट्रेनिंग की ही तस्वीर होती है.

हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि एनडीए केवल दौड़-भाग और हथियार चलाना नहीं सिखाता, बल्कि यह देश का एक बेहद प्रतिष्ठित एकेडमिक संस्थान भी है. यहां बिताए जाने वाले 3 साल यानी 6 सेमेस्टर के दौरान कैडेट्स को सैन्य ट्रेनिंग के साथ-साथ कॉलेज की तरह नियमित पढ़ाई भी पूरी करनी होती है. देश के अलग-अलग हिस्सों से आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स बैकग्राउंड के युवा यहां आते हैं, इसलिए उनके लिए अलग-अलग कोर्स और डिग्रियों की व्यवस्था की गई है. यहां से मिलने वाली ग्रेजुएशन की डिग्री दिल्ली की मशहूर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से मान्यता प्राप्त होती है.

एनडीए में कितने कोर्स संचालित होते हैं?

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में मुख्य रूप से 3 एकेडमिक कोर्स चलाए जाते हैं. इनके तहत कैडेट्स को उनकी विंग यानी आर्मी, नेवी या एयरफोर्स और 12वीं की स्ट्रीम के आधार पर ग्रेजुएशन की डिग्री दी जाती है. खड़कवासला में सैन्य ट्रेनिंग के साथ कैडेट्स थल सेना के लिए बीए या बीएससी और नौसेना-वायुसेना के लिए बीटेक की पढ़ाई करते हैं, जिनकी डिग्रियां JNU की ओर से मान्यता प्राप्त होती हैं.

बैचलर ऑफ आर्ट्स: ह्यूमैनिटीज वालों के लिए

आर्ट्स या कॉमर्स बैकग्राउंड से आने वाले कैडेट्स के लिए एनडीए में बीए कोर्स की व्यवस्था है. यह कोर्स खासतौर पर उन कैडेट्स के लिए होता है जो थल सेना की विंग चुनते हैं.

मुख्य विषय: इस 3 साल के कोर्स में कैडेट्स को राजनीति विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र, भूगोल और सामाजिक विज्ञान जैसे अहम विषयों की गहरी समझ दी जाती है.

सैन्य महत्व: इन विषयों को इस तरह तैयार किया गया है कि कैडेट्स ग्लोबल पॉलिटिक्स, रणनीतिक इतिहास और अलग-अलग देशों की भौगोलिक स्थिति को समझ सकें. आगे चलकर एक आर्मी ऑफिसर के रूप में यह समझ उनके बहुत काम आती है.

बैचलर ऑफ साइंस (बीएससी और बीएससी कंप्यूटर साइंस)

साइंस बैकग्राउंड वाले कैडेट्स के लिए एनडीए में बीएससी और बीएससी (कंप्यूटर साइंस) के कोर्स उपलब्ध हैं. यह कोर्स थल सेना के टेक्निकल या साइंटिफिक विंग के कैडेट्स के साथ-साथ कुछ मामलों में दूसरी विंग्स के लिए भी होता है.

मुख्य विषय: इसके तहत कैडेट्स को फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स और कंप्यूटर साइंस की उच्च स्तरीय पढ़ाई कराई जाती है. आज के डिजिटल और हाई-टेक मिलिट्री दौर को देखते हुए कंप्यूटर साइंस पर खास जोर दिया जाता है, ताकि कैडेट्स साइबर सुरक्षा और आधुनिक सैन्य उपकरणों की बारीकियां समझ सकें.

बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बीटेक): नेवी और एयरफोर्स के लिए अनिवार्य

अगर सपना आसमान में फाइटर जेट उड़ाने यानी वायुसेना का है या फिर समंदर की लहरों पर युद्धपोत की कमान संभालने यानी नौसेना का है, तो एनडीए में बीटेक कोर्स करना अनिवार्य हो जाता है. इसके लिए 12वीं में फिजिक्स और मैथ्स (PCM) होना जरूरी है.

कोर्स का अनोखा स्ट्रक्चर: एनडीए में बीटेक का कोर्स 4 साल का होता है, लेकिन इसका तरीका थोड़ा अलग है. कैडेट्स अपने शुरुआती 3 साल यानी 6 सेमेस्टर एनडीए खड़कवासला में बिताते हैं, जहां वे इंजीनियरिंग का बेसिक फाउंडेशन और मिलिट्री ट्रेनिंग पूरी करते हैं.

चौथा साल और फाइनल डिग्री: चौथे साल में वे अपनी संबंधित अकादमी में जाते हैं. नौसेना के कैडेट एझिमाला स्थित ‘भारतीय नौसेना अकादमी’ (INA) और वायुसेना के कैडेट डुंडीगल स्थित ‘वायुसेना अकादमी’ (AFA) पहुंचते हैं. वहां 1 साल की एडवांस ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें JNU की ओर से बीटेक की फाइनल डिग्री दी जाती है.

हर कैडेट के लिए अनिवार्य फाउंडेशन कोर्स

चाहे कैडेट बीए कर रहा हो, बीएससी या बीटेक, एनडीए के हर कैडेट को कुछ बुनियादी और अनिवार्य विषय यानी फाउंडेशन कोर्स पढ़ने ही पड़ते हैं. इनमें मिलिट्री हिस्ट्री, मिलिट्री जियोग्राफी, वेपन सिस्टम्स, वॉर स्ट्रेटेजी और कम से कम एक विदेशी भाषा सीखना शामिल है. यह विदेशी भाषा चीनी, फ्रेंच, रूसी या अरबी में से कोई भी हो सकती है.

इसके अलावा फिजिकल ट्रेनिंग, घुड़सवारी, स्विमिंग और लीडरशिप स्किल्स भी इस पूरे कोर्स का अभिन्न हिस्सा होते हैं, जो एक कैडेट को संपूर्ण सैन्य अफसर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं.

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!