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एक घंटा पहले
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डिजिटल युग ने जहां पूरी दुनिया को हमारी मुट्ठी में समेट दिया है, वहीं साइबर अपराध, डेटा लीक और हैकिंग का खतरा भी तेज रफ्तार से बढ़ता जा रहा है। सरकारी विभागों से लेकर बड़ी टेक कंपनियों तक के सर्वर हैक होने की खबरें आए दिन सामने आती रहती हैं। इसी बढ़ती चुनौती से निपटने और देश की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के मकसद से आईआईटी कानपुर ने नए एकेडमिक सेशन से 'बैचलर ऑफ साइबर सिक्योरिटी' कोर्स शुरू करने की घोषणा की है।
यह नया प्रोग्राम देश और दुनिया में बढ़ते साइबर खतरों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। कोर्स पूरा करने के बाद युवाओं के लिए न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नौकरियों के बड़े अवसर खुलने की उम्मीद है। कोडिंग, एथिकल हैकिंग और डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों के लिए यह कोर्स बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
साइबर सिक्योरिटी कोर्स की रूपरेखा
आईआईटी कानपुर का 'बैचलर ऑफ साइबर सिक्योरिटी' प्रोग्राम चार साल का अंडरग्रेजुएट कोर्स है। इसका पाठ्यक्रम छात्रों को सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय प्रैक्टिकल और लाइव प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर देगा। इसमें क्रिप्टोग्राफी, नेटवर्क सिक्योरिटी, एथिकल हैकिंग, थ्रेट इंटेलिजेंस, डिजिटल फॉरेंसिक और एआई आधारित सुरक्षा प्रणालियों की पढ़ाई कराई जाएगी। आईआईटी कानपुर के पास साइबर सुरक्षा का मजबूत इकोसिस्टम और C3i हब मौजूद है, जिसका लाभ इस कोर्स के छात्रों को मिलेगा।
केवल 60 सीटें और JEE एडवांस्ड के बिना दाखिला
संस्थान ने इस प्रोग्राम के लिए केवल 60 सीटें निर्धारित की हैं। खास बात यह है कि इसमें दाखिले के लिए जेईई एडवांस्ड स्कोर की अनिवार्यता हटा दी गई है। इसके स्थान पर चयन प्रक्रिया को तीन चरणों में बांटा गया है। सबसे पहले जेईई मेन के प्रदर्शन के आधार पर उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके बाद उम्मीदवार के पिछले साइबर सिक्योरिटी कार्य, एथिकल हैकिंग के अनुभव और इस क्षेत्र में किए गए उनके काम का मूल्यांकन किया जाएगा।
जुलाई में ऑन-कैंपस हैकाथॉन
इस अनोखी चयन प्रक्रिया का सबसे रोचक हिस्सा ऑन-कैंपस हैकाथॉन है। जेईई मेन स्क्रीनिंग और प्रोफाइल शॉर्टलिस्टिंग के बाद चुने गए छात्रों को जुलाई के पहले हफ्ते में आईआईटी कानपुर के कैंपस में बुलाया जाएगा। यहां लाइव हैकाथॉन आयोजित होगा, जिसमें छात्रों को अपनी तकनीकी और एथिकल हैकिंग स्किल्स का सीधा प्रदर्शन करना होगा। संस्थान का मुख्य लक्ष्य ऐसे छात्रों की पहचान करना है, जिनके पास साइबर सुरक्षा और कोडिंग को लेकर किताबी ज्ञान से अधिक असली और व्यावहारिक समझ हो।
शुरुआती दो साल कैंपस में पढ़ाई
चार साल के इस अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के शुरुआती दो साल छात्रों को आईआईटी कानपुर के मुख्य कैंपस में बिताने होंगे। इस अवधि में उन्हें साइबर सुरक्षा की बुनियादी और एडवांस थ्योरी पढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही संस्थान की हाई-टेक लैबोरेट्रीज में नियंत्रित माहौल के भीतर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि छात्र नेटवर्क सिक्योरिटी, क्रिप्टोग्राफी और थ्रेट इंटेलिजेंस जैसे विषयों को बारीकी से समझ सकें।
अंतिम दो साल सरकारी सुरक्षा संगठनों में इंटर्नशिप
इस कोर्स की सबसे बड़ी खूबी इसका अंतिम दो साल का ढांचा है। तीसरे और चौथे साल में छात्रों को क्लासरूम में बैठकर पढ़ाई नहीं करनी होगी, बल्कि उन्हें सीधे भारत सरकार के शीर्ष सुरक्षा संगठनों में इंटर्नशिप के लिए भेजा जाएगा। इस दौरान छात्र देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वास्तविक साइबर प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। लाइव साइबर हमलों को रोकने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखने का हैंड्स-ऑन अनुभव उन्हें देश की सबसे बड़ी एजेंसियों के साथ काम करके मिलेगा। इस अनुभव के बाद बड़ी टेक कंपनियां और सरकारी विभाग छात्रों को लाखों-करोड़ों के सैलरी पैकेज पर तुरंत भर्ती करेंगे।
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