पिता के साथ फुटपाथ पर बेची सब्जी, बमुश्किल जुटाई स्कूल की फीस, आज विदेश में सीए बनकर कमा रहे लाखों करियर 7 घंटे पहले 2
मुंबई के विक्रोली की तंग गलियों में पले-बढ़े अभिषेक वैश्य सुबह तीन बजे पिता के साथ सब्जी बेचा करते थे। आज वही युवा चार्टर्ड अकाउंटेंट बनकर ओमान और यूएई में अपनी फर्म चला रहे हैं।

कहते हैं कि किस्मत हाथ की लकीरों से जरूर तय होती है, मगर उसे पलटने की ताकत सिर्फ पसीने और दृढ़ इरादों में होती है। मुंबई के विक्रोली की संकरी गलियों से निकलकर ओमान और यूएई की कॉर्पोरेट इमारतों तक पहुंचने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिषेक वैश्य की कहानी इसी बात की मिसाल है। एक मशहूर यूट्यूबर कुशल लोढ़ा को दिए इंटरव्यू में अभिषेक ने अपने मुश्किल लेकिन प्रेरणादायक सफर की परतें खोलीं।

तेरह साल की उम्र में संघर्ष भरी सुबह

महज 13 साल की उम्र में ही अभिषेक को घर की आर्थिक तंगी का अहसास हो गया था। उनके पिता मुंबई की दादर सब्जी मंडी में सड़क किनारे फुटपाथ पर दुकान लगाते थे। पिता का सहारा बनने के लिए अभिषेक रोज सुबह 3 बजे उनके साथ मंडी पहुंच जाते थे।

सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि यह काम सुबह 3 से 6:30 बजे के बीच ही निपटाना होता था, क्योंकि उसके बाद पुलिस की गाड़ी आ जाती थी और वहां दुकान लगाने की इजाजत नहीं थी। इस भागदौड़ के बाद अभिषेक सीधे स्कूल जाते और रात में देर तक पढ़ाई करते थे। 150 स्क्वायर फीट के छोटे से कमरे में पांच लोगों का परिवार किसी तरह गुजर-बसर करता था।

दोस्त की सलाह ने बदल दी राह

स्कूली पढ़ाई खत्म होने को थी, लेकिन अभिषेक के पास भविष्य को लेकर कोई पक्की योजना नहीं थी। तभी उनके दोस्त रोहित ने उनकी जिंदगी में सबसे बड़ा मोड़ ला दिया। रोहित ने ही अभिषेक से आगे की राह पूछी और उन्हें चार्टर्ड अकाउंटेंसी (सीए) का कोर्स करने की सलाह दी।

उस समय अभिषेक को सीए के बारे में बस इतना मालूम था कि यह देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। रोहित ने ही आगे बढ़कर अभिषेक का फॉर्म भरा और इस तरह सब्जी बेचने वाले इस लड़के ने कॉर्पोरेट जगत की सबसे बड़ी परीक्षा की ओर कदम बढ़ाया।

परीक्षा के दिनों में 18 घंटे की मेहनत

सीए की पढ़ाई के दौरान भी अभिषेक ने सब्जी बेचना नहीं छोड़ा। वह सुबह काम करते और रात में पढ़ते थे। लेकिन जब सीए परीक्षा के लिए 3-4 महीने का लीव पीरियड मिलता, तब वह बाकी दुनिया से पूरी तरह कट जाते थे।

अभिषेक बताते हैं कि परीक्षा के दिनों में वह किसी भी तरह समय निकालकर रोजाना 16 से 18 घंटे तक पढ़ाई करते थे। उनकी यह तपस्या रंग लाई और नतीजा आते ही वह सीए बन चुके थे। 17 जनवरी 2016 की वह तारीख उन्हें आज भी याद है, जब उन्होंने अपने पिता से कहा था कि अब आप रिटायर हो जाइए, आगे सब मैं संभाल लूंगा। यह सुनते ही पिता की वर्षों की थकान आंखों से आंसुओं के रूप में बह निकली।

छोटे कमरे से आलीशान टाउनशिप तक

अभिषेक के पिता सब्जी बेचकर महीने के बमुश्किल 25 से 30 हजार रुपये ही कमा पाते थे, जिससे घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई बेहद मुश्किल से चल पाती थी। मगर सीए बनते ही अभिषेक ने सबसे पहले अपने माता-पिता की जिंदगी संवारी।

सिर्फ 21 साल की उम्र में उन्होंने अपनी कमाई से माता-पिता को 150 एकड़ की एक आलीशान टाउनशिप में 2BHK फ्लैट गिफ्ट किया, जिसकी कीमत करीब 1 करोड़ रुपये थी। 150 स्क्वायर फीट के उस तंग कमरे से निकलकर इस शानदार घर में शिफ्ट होना उनके माता-पिता के लिए किसी पुनर्जन्म से कम नहीं था।

कभी 200 रुपये की दिहाड़ी, आज विदेश में अपनी फर्म

कभी 200 तो कभी 400 रुपये की दिहाड़ी के लिए तरसने वाले अभिषेक को सीए बनते ही ओमान में नौकरी मिल गई। वहां उनकी शुरुआती सैलरी ही 1.5 लाख रुपये प्रति माह थी। करीब 6 साल कॉर्पोरेट दुनिया में नौकरी करने के बाद जब उन्होंने जॉब छोड़ी, तब उनका वेतन 2.5 लाख रुपये महीना हो चुका था।

लेकिन अभिषेक यहीं नहीं रुके। आज वे ओमान और यूएई में अपनी खुद की सीए प्रैक्टिस फर्म चलाते हैं, जहां वे बड़ी कंपनियों को फाइनेंशियल कंसल्टेंसी, एडवाइजरी और रिस्ट्रक्चरिंग जैसी सेवाएं देते हैं और लाखों में कमाई करते हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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