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एक घंटा पहले
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शिक्षा को बनाया परिवार की पहचान
पूर्वी चंपारण जिले के रामगढ़वा प्रखंड स्थित अहिरवलिया गांव के एक परिवार ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से सफलता की नई इबारत लिखी है। नथुनी मिश्रा, जिन्होंने जीवन का एक बड़ा हिस्सा घोर गरीबी और फूस की झोपड़ी में बिताया, उन्होंने शिक्षा के महत्व को कभी कम नहीं होने दिया। आज उनके उसी घर की नींव पर उनके दो पोतों, विवेक मिश्रा और दिलजीत मिश्रा ने 70वीं BPSC परीक्षा उत्तीर्ण कर सरकारी सेवा में बड़े पदों पर जगह बनाई है।
विवेक मिश्रा का सफर: इंजीनियरिंग से प्रशासनिक सेवा तक
विवेक मिश्रा ने अपनी स्कूली शिक्षा गांव के सरकारी विद्यालय से शुरू की और बाद में गणेश पाण्डेय महावीर लाल उच्च विद्यालय से मैट्रिक किया। इसके बाद उन्होंने गोपालगंज से इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पूरा किया। विवेक की मेहनत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे NTPC और रेलवे में जूनियर इंजीनियर के रूप में काम कर चुके हैं। पिछले वर्ष उन्हें जल संसाधन विभाग से भी नियुक्ति पत्र मिला था, लेकिन उन्होंने बड़े प्रशासनिक अधिकारी बनने के अपने सपने को प्राथमिकता दी और उस अवसर को छोड़ दिया। अब उनका चयन स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर हुआ है।
दिलजीत मिश्रा की उपलब्धि: भाई का मिला साथ
विवेक के भाई दिलजीत मिश्रा ने भी BDO (प्रखंड विकास पदाधिकारी) के पद पर चयनित होकर परिवार को गौरवान्वित किया है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद हरिशंकर वर्मा कोऑपरेटिव कॉलेज से 12वीं और पटना के कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक की डिग्री हासिल की। दिलजीत ने बताया कि इस सफलता में उन्हें अपने बड़े भाई विवेक मिश्रा का भरपूर मार्गदर्शन मिला। इसके अलावा, वे CDS की लिखित परीक्षा में भी दो बार उत्तीर्ण हो चुके हैं।
शिक्षक पिता की सीख
विवेक और दिलजीत के पिता गोपाल मिश्रा, जो स्वयं पश्चिमी चंपारण जिले के चनपटिया में एक सरकारी शिक्षक हैं, अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता नथुनी मिश्रा को देते हैं। गोपाल मिश्रा का कहना है कि जिस प्रकार उनके पिता ने अभावों के बावजूद घर में पढ़ाई का माहौल तैयार किया था, उन्होंने भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाया है। उनका मानना है कि शिक्षा ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जिससे उनका परिवार इस मुकाम तक पहुंच सका है।
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