बिहार
एक घंटा पहले
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पूर्वी चंपारण जिले के अरेराज में बसा हल्दिया चौक अपनी खास बनावट के कारण लोगों के बीच एक पहचान बना चुका है। देखने में यह किसी आम चौराहे जैसा लगता है, लेकिन इसकी संरचना इसे बाकी जगहों से अलग कर देती है। यहां से एक साथ कई दिशाओं में रास्ते निकलते हैं, जिसके चलते इसे 'भूल-भुलैया चौक' भी कहा जाता है।
एक चौक, कई दिशाओं के रास्ते
हल्दिया चौक की सबसे अनोखी बात यह है कि इस एक ही जगह से चार जिलों के लिए रास्ते निकलते हैं। इतना ही नहीं, इनमें से दो रास्ते जिले के तीन बड़े पर्यटन स्थलों तक पहुंचाते हैं। यही वजह है कि यह चौक केवल आवाजाही का केंद्र नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का द्वार भी बन गया है।
दाहिनी ओर का रास्ता: चार जिलों तक पहुंच
हल्दिया चौक के बोर्ड के दाईं ओर जाने वाला रास्ता बिहार के चार जिलों को जोड़ता है। इस मार्ग से गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, वैशाली और पटना तक पहुंचा जा सकता है। चंपारण क्षेत्र के बहुत से लोग पटना जाने के लिए इसी रास्ते को चुनते हैं।
बाईं ओर का रास्ता: जिला मुख्यालय की राह
बोर्ड के बाईं ओर वाला रास्ता पूर्वी चंपारण के जिला मुख्यालय मोतिहारी की ओर जाता है। इसी मार्ग से हरसिद्धि प्रखंड होते हुए छपवा और सुगौली तक भी आसानी से पहुंचा जा सकता है।
बीच का रास्ता और अशोक स्तंभ
चौक के बीच से निकलने वाला रास्ता आगे चलकर पहाड़पुर प्रखंड होते हुए पश्चिमी चंपारण जिले में प्रवेश करता है। इसी मार्ग पर थोड़ी ही दूरी पर रढिया नामक जगह है, जहां सम्राट अशोक का बनवाया हुआ अशोक स्तंभ आज भी मौजूद है।
सोमेश्वर महादेव मंदिर
हल्दिया चौक से बेहद नजदीक जिले का एक खास धार्मिक स्थल भी है। चौक के बोर्ड से बाईं ओर वाले रास्ते पर कुछ ही दूरी पर प्रसिद्ध सोमेश्वर महादेव मंदिर स्थित है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
केसरिया बौद्ध स्तूप
बोर्ड के ठीक दाईं ओर वाला रास्ता केसरिया की दिशा में जाता है, जहां विश्व प्रसिद्ध केसरिया बौद्ध स्तूप है। यह बौद्ध स्तूप बेहद विशाल है और यहां कई देशों से भगवान बुद्ध में आस्था रखने वाले लोग घूमने आते हैं। यह स्थल पूर्वी चंपारण के एक लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट के रूप में भी जाना जाता है।
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