बिहार का अनोखा 'तालाबों का गांव', जहां बाढ़ की मार ने लिख दी खुशहाली की नई कहानी बिहार एक घंटा पहले 2
पूर्वी चंपारण के संग्रामपुर स्थित बरियारिया गांव में आज करीब 200 तालाब हैं और ग्रामीण बड़े पैमाने पर मछली पालन कर आर्थिक रूप से मजबूत हो चुके हैं। कभी बाढ़ में फसलें बहाने वाला यह गांव अब समृद्धि की मिसाल बन गया है।

बिहार में गांवों की भरमार है और इनमें कुछ गांव अपनी किसी खास पहचान के कारण लोगों के बीच चर्चित रहते हैं। ऐसा ही एक नाम है बरियारिया गांव, जो पूर्वी चंपारण जिले के संग्रामपुर इलाके में स्थित है। इस गांव में जिधर भी नजर दौड़ाइए, चारों ओर सिर्फ तालाब ही तालाब दिखाई देते हैं। यही वजह है कि इसे 'तालाबों का गांव' भी कहा जाता है। मौजूदा समय में यहां कुल 200 तालाब मौजूद हैं और पूरे गांव की आर्थिक हालत बेहद मजबूत है। लेकिन एक दौर ऐसा भी था, जब यहां पेट भरने लायक अनाज उगाना भी टेढ़ी खीर साबित होता था।

बाढ़ में हर साल बह जाती थीं फसलें

गांव के एक बड़े मत्स्य पालक नंदलाल भगत बताते हैं कि पहले उनका पूरा गांव खराब आर्थिक हालात से जूझ रहा था। परेशानी इतनी गहरी थी कि ग्रामीण हर साल धान की बुआई तो करते, मगर हर बार बाढ़ आते ही सारी फसल पानी में बह जाती और लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ता। उनके मुताबिक, यह इलाका हमेशा से बाढ़ प्रभावित रहा है और गांव की जमीन भी ढलान वाली है, जिसकी वजह से खेती कर पाना लगभग असंभव हो गया था।

मिट्टी बेचने से मिला तालाब का रास्ता

हालात से जूझते हुए नंदलाल भगत ने जीविका के लिए ईंट बनाने वाले चिमनी मालिकों को मिट्टी बेचना शुरू किया। मिट्टी बेचते-बेचते करीब 2 एकड़ जमीन में बड़ा गड्ढा बन गया और यहीं से उनके मन में मछली पालन का विचार आया। वह बताते हैं कि शुरुआत में मत्स्य पालन में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा, मगर मत्स्य विभाग के सहयोग से उन्होंने कई तालाब बनवा लिए। उनकी इस पहल को देखकर दूसरे ग्रामीण भी तालाब खुदवाने लगे और धीरे-धीरे पूरा गांव तालाबों के गांव में बदल गया।

हर तरह की मछलियों का होता है पालन

नंदलाल भगत के अनुसार, आज उनका पूरा गांव आर्थिक रूप से मजबूत है और सुखी जीवन बिता रहा है। उनका कहना है कि गांव में लगभग हर किस्म की मछलियों का पालन होता है। इनमें रोहू, कतला और ग्रास कार्प जैसी बड़ी मछलियां तो शामिल हैं ही, साथ ही गांव के खुले तालाबों में लगभग हर तरह की छोटी मछलियां भी पाई जाती हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!