पेपर कप में गरम चाय-कॉफी पीना सेहत के लिए खतरा, भोपाल CMHO ने जारी की चेतावनी स्वास्थ्य 3 दिन पहले 16
भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने आगाह किया है कि पेपर कप में गरम चाय या कॉफी पीने से शरीर में माइक्रोप्लास्टिक पहुंचता है, जो कैंसर तक का कारण बन सकता है। आईआईटी खड़गपुर की रिसर्च भी इसी ओर इशारा करती है।

घर से बाहर चाय या कॉफी पीते समय अब ज्यादातर लोग प्लास्टिक की जगह पेपर कप का सहारा लेने लगे हैं। आम धारणा यही है कि प्लास्टिक के मुकाबले पेपर कप सेहत के लिहाज से बेहतर हैं। लेकिन डॉक्टर इस सोच से सहमत नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पेपर कप बनाने में कई तरह के केमिकल और प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है, जो शरीर के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। आईआईटी खड़गपुर की रिसर्च बताती है कि पेपर कप में गरम चाय या कॉफी पीना बीमारियों को न्योता दे सकता है। भोपाल जिले की विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) मनीष शर्मा बता रहे हैं कि पेपर कप कितने हानिकारक हैं और इनके बदले हमें किन विकल्पों को अपनाना चाहिए।

आखिर पेपर कप क्यों हैं हानिकारक

पेपर कप में रखा तरल पदार्थ रिसे नहीं, इसके लिए कप के भीतरी हिस्से पर पॉलीइथिलीन प्लास्टिक की वाटरप्रूफ परत चढ़ाई जाती है। जैसे ही इसमें गरम कॉफी या पानी डाला जाता है, यह प्लास्टिक पिघलकर माइक्रोप्लास्टिक में तब्दील हो जाती है। माइक्रोप्लास्टिक के ये कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि इन्हें केवल माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है। धीरे-धीरे ये कण पेय में घुलने लगते हैं और शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं।

एक ही बार में निकलते हैं हजारों कण

आईआईटी खड़गपुर ने कुछ साल पहले जो अध्ययन किया था, उसमें सामने आया कि अगर किसी पेपर कप में 15 मिनट तक कोई गरम तरल पदार्थ रखा जाए तो उसमें से माइक्रोप्लास्टिक निकलने लगता है, जो कैंसर का कारण बन सकता है। दरअसल एक पेपर कप में लगभग 20,000 से 25,000 माइक्रोप्लास्टिक कण मौजूद हो सकते हैं। ये कण उच्च तापमान पर पिघलते हैं और शरीर में पहुंचकर सेल्यूलर स्तर पर कोशिकाओं के DNA स्ट्रक्चर को बदल सकते हैं, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकता है। इसके अलावा इनसे सूजन संबंधी बीमारियां भी हो सकती हैं, और हार्मोनल बदलाव व इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण भी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

बेहतर विकल्प क्या हैं

अच्छी सेहत के लिए जरूरी है कि पेपर या प्लास्टिक के कप के इस्तेमाल से परहेज किया जाए। इनकी जगह सिरेमिक या स्टेनलेस स्टील के कप अपनाने चाहिए। अगर आप घर के बाहर चाय या कॉफी पी रहे हैं, तो मिट्टी का कुल्हड़ सबसे बेहतरीन विकल्प माना जाता है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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