हिमाचल प्रदेश में जल जीवन मिशन पर संकट, केंद्र के पास अटके 1227 करोड़ रुपये हिमाचल प्रदेश एक घंटा पहले 2
हिमाचल प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत केंद्र सरकार से मिलने वाली 1227 करोड़ रुपये की राशि न मिलने से पेयजल परियोजनाओं का काम धीमा पड़ गया है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने केंद्र पर सभी शर्तें पूरी करने के बावजूद फंड जारी न करने का आरोप लगाया है।

फंड की कमी से प्रभावित हो रही हैं जल परियोजनाएं

हिमाचल प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत चलाई जा रही विभिन्न पेयजल योजनाओं के सामने अब एक बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार से मिलने वाली एक भारी भरकम राशि के लंबित होने से विकास कार्यों की रफ्तार थम सी गई है। फतेहपुर में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इस स्थिति के लिए केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया है कि केंद्र की ओर से 1227 करोड़ रुपये की लंबित राशि जारी नहीं की जा रही है, जिसका सीधा असर राज्य की जल परियोजनाओं और ठेकेदारों के भुगतान पर पड़ रहा है।

केंद्र सरकार पर शर्तों को नजरअंदाज करने का आरोप

उपमुख्यमंत्री ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि जल जीवन मिशन के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए केंद्र सरकार को कुल 6000 करोड़ रुपये की राशि जारी करनी थी। हालांकि, इसमें से 1227 करोड़ रुपये अभी भी केंद्र के पास अटके हुए हैं। मुकेश अग्निहोत्री के अनुसार, राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन से जुड़ी केंद्र सरकार की सभी अनिवार्य शर्तों और जरूरी औपचारिकताओं को समय रहते पूरा कर दिया है, फिर भी फंड रिलीज करने में देरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य पूरी तरह से ठप न पड़ जाएं, इसके लिए राज्य सरकार ने अपने सीमित संसाधनों से 100 करोड़ रुपये की राशि जारी की है, ताकि काम में कुछ गति बनी रहे। बावजूद इसके, कई ठेकेदारों का भुगतान अभी भी बकाया है, जिससे काम की गति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

पिछली सरकार पर भी साधा निशाना

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर भी कड़े प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी लाभ उठाने के लिए पिछली सरकार ने जल जीवन मिशन की योजनाओं को समय से पहले ही पूरा घोषित करने का ढोंग किया था। वास्तविकता यह है कि प्रदेश में आज भी जल जीवन मिशन की स्थिति काफी संतोषजनक नहीं है। उन्होंने खुलासा किया कि राज्य में लगभग 100-100 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन बड़ी पेयजल परियोजनाएं अभी भी अपने शुरुआती चरण में ही हैं। इसके अलावा, राज्य की आधे से अधिक जल योजनाएं ऐसी हैं जो 80 प्रतिशत का काम भी पूरा नहीं कर पाई हैं। उनका मानना है कि यदि केंद्र लंबित 1227 करोड़ रुपये जारी कर दे, तो इन अधूरी पड़ी योजनाओं को तेजी से पूरा करके जनता को समर्पित किया जा सकता है।

केंद्र सरकार के दावों पर सवाल

मुकेश अग्निहोत्री ने आगे कहा कि एक ओर केंद्र सरकार ने पहले यह दावा किया था कि हिमाचल प्रदेश में जल जीवन मिशन का कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है और अब कोई भी प्रोजेक्ट शेष नहीं बचा है, जिसके कारण कोई देनदारी भी नहीं है। इसके विपरीत धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। उपमुख्यमंत्री ने केंद्र से मांग की है कि वह जल्द से जल्द लंबित राशि जारी करे ताकि प्रदेश के हर घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य समयबद्ध तरीके से हासिल किया जा सके। इस दौरान फतेहपुर के विधायक एवं राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया भी उपस्थित रहे और उन्होंने भी इस मुद्दे पर राज्य की चिंताओं को साझा किया।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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