मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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मध्य प्रदेश के भिंड जिले से धोखाधड़ी और वाहन चोरी का एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसे सुनकर पुलिस भी दंग रह गई। यहां वकालत की पढ़ाई कर रहे छात्रों ने अपने साथियों के साथ मिलकर ठगी और चोरी का एक अनोखा तरीका निकाला था। वे पहले तो किराये पर गाड़ी लेते थे, फिर नकली दस्तावेज बनाकर उसे किसी सीधे-साधे इंसान को बेच देते थे। इसके बाद गाड़ी में लगे GPS की मदद से उसे दोबारा चुराकर असली मालिक को सौंप देते थे।
इस बेहद शातिर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए भिंड की बरोही थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने तीन आरोपियों को धर दबोचा है। पकड़े गए बदमाशों के पास से पुलिस ने चोरी की गई वैगनआर कार, फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और 30 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस फिलहाल गिरोह के दो अन्य फरार सदस्यों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।
बेटी के इलाज का बहाना बनाकर बेची किराये की कार
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब फरियादी पवन भदौरिया ने 21 जुलाई 2026 को बरोही थाने में शिकायत दर्ज कराई। पवन ने बताया कि उन्होंने एक व्यक्ति से चार लाख रुपये में एक वैगनआर कार खरीदने का सौदा किया था। कार बेचने वाले आरोपी ने पवन के सामने अपनी बेटी की गंभीर बीमारी का रोना रोया और कहा कि उसे इलाज के लिए तुरंत पैसों की सख्त जरूरत है।
आरोपी की बातों में आकर पवन ने उसे तत्काल 1.68 लाख रुपये दे दिए। इस सौदे को पक्का करने के लिए एक हजार रुपये के ई-स्टाम्प पर बाकायदा नोटरी भी कराई गई थी। तय हुआ था कि बाकी बचे 2.32 लाख रुपये भुगतान करने के बाद गाड़ी का मालिकाना हक पवन के नाम ट्रांसफर कर दिया जाएगा। विश्वास जीतने के लिए ठगों ने पवन को कार का रजिस्ट्रेशन कार्ड और अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी भी सौंप दी थी।
घर के सामने खड़ी गाड़ी रातों-रात हो गई गायब
पवन कार खरीदकर अपने घर ले आए। इसके बाद 26 जुलाई की रात को उन्होंने हमेशा की तरह कार अपने घर के बाहर खड़ी की थी। लेकिन अगली सुबह जब वे उठे तो गाड़ी वहां से गायब थी। अपनी नई-नवेली गाड़ी चोरी होने के बाद पवन के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना बरोही थाना पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस ने चोरी का मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और साइबर सेल की टीम ने मिलकर साक्ष्य जुटाने शुरू किए। पुलिस ने अपने मुखबिरों को भी इस काम में लगाया। जांच के दौरान पुलिस के हाथ कुछ बेहद चौंकाने वाले सुराग लगे। पुलिस को पता चला कि इलाके में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो किराये पर गाड़ियां लेता है और फिर उनके फर्जी कागजात बनाकर उन्हें बेच देता है। बाद में वे GPS की मदद से उसी गाड़ी को चोरी कर लेते हैं और तय समय पर किराये की रकम के साथ मूल मालिक को गाड़ी वापस कर देते हैं।
कानून के छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले निकले शातिर ठग
इस पुख्ता जानकारी के बाद पुलिस ने जाल बिछाया और दबिश देकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मयंक राठौर और प्रशांत राठौर के रूप में हुई है, जो ग्वालियर जिले के गदईपुरा के रहने वाले हैं। वहीं तीसरा आरोपी धर्मेंद्र रावत भिंड जिले के गोहद का निवासी है। पुलिस ने इनके पास से चोरी की गई वैगनआर कार, नकली रजिस्ट्रेशन कार्ड और 30 हजार रुपये की नकदी जब्त की है।
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि पकड़े गए आरोपियों में से ग्वालियर का रहने वाला एक युवक वकालत की पढ़ाई कर रहा है, जबकि दूसरा आरोपी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटा हुआ है। वकालत की पढ़ाई करने के बावजूद आरोपी कानून की आंखों में धूल झोंकने का यह खतरनाक खेल खेल रहे थे।
GPS के जरिए ऐसे ट्रैक करते थे गाड़ी की लोकेशन
आरोपियों ने पुलिस के सामने कबूल किया कि वे पहले तो किराये पर कोई भी चार पहिया वाहन हासिल करते थे। इसके बाद कंप्यूटर की मदद से उसके रजिस्ट्रेशन कार्ड और अन्य दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर अपना नाम और पता बदल देते थे। फिर वे किसी जरूरतमंद खरीदार को ढूंढते थे और पैसों की भारी किल्लत या बीमारी का झूठा नाटक करके उसे कम दाम में कार बेच देते थे।
गाड़ी बेचने से ठीक पहले वे चुपके से उस वाहन में एक GPS डिवाइस फिट कर देते थे। इस डिवाइस के जरिए वे लगातार गाड़ी की लोकेशन पर नजर रखते थे। जैसे ही खरीदार गाड़ी लेकर अपने घर जाता, आरोपी उसकी पल-पल की हरकत ट्रैक करते रहते थे। मौका पाते ही वे डुप्लीकेट चाबी की मदद से गाड़ी दोबारा चुरा लेते थे। इसके बाद वे उस गाड़ी को मूल मालिक के पास ले जाते और किराये की तय रकम के साथ उसे सुरक्षित लौटा देते थे, जिससे किसी को शक भी नहीं होता था।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने कुछ समय पहले भिंड के बीटीआई रोड से भी इसी तरह एक कार चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस फिलहाल पकड़े गए आरोपियों से गहराई से पूछताछ कर रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि गिरोह के दो अन्य फरार सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद वाहन चोरी की कई अन्य वारदातों का भी बड़ा खुलासा हो सकता है।
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