व्यापार
एक घंटा पहले
4
विचारों
चीन की चालबाजी और भारत का सबक
जर्मनी की एक कंपनी ने टनल बोरिंग मशीन यानी TBM का निर्माण किया था, लेकिन चीन ने जानबूझकर इसकी डिलीवरी रोक दी। इस घटना के कारण भारत में चल रहे कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स जैसे बुलेट ट्रेन और मेट्रो लाइनों का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ। चीन की इस हरकत ने भारत को एक बड़ा सबक दिया है कि महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भर रहना कितना जोखिम भरा हो सकता है।
स्वदेशी निर्माण की नई तैयारी
चीन की इस नीति के बाद भारत सरकार ने अब कमर कस ली है। सरकार देश के भीतर ही भारी मशीनों का उत्पादन शुरू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके लिए सरकार PLI यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव जैसी नई योजनाओं पर काम कर रही है, ताकि देश में ही ऐसी मशीनें तैयार की जा सकें जो अब तक आयात की जाती थीं।
चीन प्लस वन की रणनीति
आजकल पूरी दुनिया China+1 रणनीति अपना रही है, जिसका मतलब है कि कंपनियां अब चीन पर निर्भर रहने के बजाय अन्य देशों को प्राथमिकता दे रही हैं। भारत इस वैश्विक बदलाव में सबसे भरोसेमंद और मजबूत साथी के रूप में उभर रहा है।
दुनिया को मिलेगा ड्रैगन प्रूफ विकल्प
भारत में बनने वाली ये मशीनें न केवल चीन पर हमारी निर्भरता को खत्म करेंगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बनाएंगी। आने वाले समय में भारत में निर्मित ये भारी मशीनें पूरी दुनिया के इंफ्रास्ट्रक्चर को ड्रैगन प्रूफ बनाने में मदद करेंगी। इससे भारत की तकनीकी क्षमता बढ़ेगी और वैश्विक बाजार में एक नए मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भारत की धाक जमेगी।
Comments
0 comment