दिल्ली में CJP प्रदर्शन के दौरान उपद्रव: सांसद चंद्रशेखर आजाद पर गंभीर आरोप, पुलिसकर्मियों पर हुआ जानलेवा हमला भारत एक महीने पहले 48
दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें कई पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। इस मामले में सांसद चंद्रशेखर आजाद और उनके समर्थकों पर गंभीर आरोप लगे हैं।

जंतर-मंतर पर फिर से सक्रिय हुए प्रदर्शनकारी

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP द्वारा आयोजित प्रदर्शन ने सोमवार को उस समय उग्र रूप ले लिया जब वहां जमकर हिंसा हुई। हालांकि, संसद मार्च के दौरान हुए इस बवाल के बाद दिल्ली पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए जंतर-मंतर को खाली करवा दिया था, लेकिन रात होते-होते प्रदर्शनकारी एक बार फिर वहां एकत्रित होने लगे। इस हिंसा के संबंध में दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक तौर पर एफआईआर दर्ज कर ली है। अब इस पूरे प्रकरण में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मुखिया और सांसद चंद्रशेखर आजाद सवालों के घेरे में हैं।

सांसद चंद्रशेखर और समर्थकों पर गंभीर आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना के समय चंद्रशेखर आजाद के साथ 8 से 10,000 लोग जय सिंह रोड पर मौजूद थे और वे जबरन संसद की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। भीड़ ने सार्वजनिक मार्ग को पूरी तरह से बाधित कर दिया था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा और सेंट्रल डीसीपी रोहित राजबीर वहां पहुंचे। आरोप है कि इसी दौरान चंद्रशेखर के समर्थकों के बीच मौजूद कुछ उपद्रवियों ने कोआपरेटिव सोसाइटी की टाइल्स उखाड़कर उन पर हमला किया। हमलावरों ने न केवल कांच की बोतलों का इस्तेमाल किया, बल्कि पत्थरों और जूतों से भी पुलिस बल पर प्रहार किया।

पुलिसकर्मियों पर प्री-प्लान्ड हमला

इस हिंसक झड़प में कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायल पुलिस अधिकारियों ने बताया कि भीड़ में छात्रों की तुलना में उपद्रवी तत्वों की संख्या कहीं ज्यादा थी। हमला इतना भीषण था कि भीड़ ने डीसीपी के एसओ श्रीनिवास को चारों तरफ से घेर लिया। इस हमले में श्रीनिवास के दाहिने पैर की हड्डी टूट गई है और उनके हाथों में भी गंभीर चोटें आई हैं। घटनास्थल पर मौजूद पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा हमला पहले से ही सुनियोजित था। सुरक्षा बलों का मानना है कि प्रदर्शन की आड़ में दंगा करने की साजिश रची गई थी, जिसकी योजना कथित तौर पर व्हाट्सएप ग्रुप चैट के जरिए तैयार की गई थी। भीड़ के उग्र व्यवहार को देखते हुए डीसीपी सचिन शर्मा और डीसीपी रोहित राजबीर को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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