दिल्ली संसद मार्च हिंसा: पुलिस जांच के दायरे में आए कई WhatsApp ग्रुप, 118 जवान घायल दिल्ली एक महीने पहले 51
दिल्ली में संसद मार्च के दौरान भड़की हिंसा को लेकर पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच तेज कर दी है। इस मामले में 250 से अधिक वीडियो फुटेज की मदद से उपद्रवियों की पहचान की जा रही है और हिंसा के पीछे की गहरी साजिश का पता लगाया जा रहा है।

दिल्ली पुलिस की सख्ती और जांच का दायरा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा किए गए संसद मार्च के आह्वान के बाद शहर में स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। इस दौरान कई इलाकों में बड़े स्तर पर हिंसा और उपद्रव देखने को मिला, जिसमें सुरक्षा बलों के जवानों को भारी चोटें आई हैं। मंगलवार को प्रदर्शनकारी एक बार फिर जंतर-मंतर पर एकत्रित हुए, लेकिन दिल्ली पुलिस अब इस पूरी घटना को लेकर अत्यंत सख्त है। पुलिस ने मामले में कई FIR दर्ज की हैं और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस अब उन सभी बिंदुओं की बारीकी से जांच कर रही है जिन्होंने इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक रूप दिया।

जांच के मुख्य आधार और तकनीकी साक्ष्य

दिल्ली पुलिस की इस पूरी जांच की कमान वीडियो फुटेज और तकनीकी सबूतों के हाथ में है। पुलिस के पास इस समय मोबाइल वीडियो, CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग, ड्रोन से ली गई फुटेज और पुलिस बॉडी कैमरों द्वारा कैद किए गए 250 से ज्यादा वीडियो मौजूद हैं। इन साक्ष्यों के जरिए पुलिस उन सभी उपद्रवियों की पहचान करने में जुटी है जिन्होंने कानून को हाथ में लिया था। जांच के दौरान पुलिस इन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है:

  • पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या उपद्रवियों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।
  • यह भी जांचा जा रहा है कि क्या प्रदर्शनकारी पहले से ही किसी सुनियोजित योजना के साथ जंतर-मंतर पहुंचे थे।
  • पुलिस की टीम इस बात की तहकीकात कर रही है कि 20 मार्च को भाजपा के संसद मार्च के दौरान जिन्होंने गाड़ियों में तोड़फोड़, पथराव और हिंसा की, क्या वे किसी संगठित गिरोह का हिस्सा थे।
  • जांच का एक बड़ा हिस्सा यह भी है कि हिंसा भड़काने के लिए क्या किसी WhatsApp या Telegram ग्रुप का इस्तेमाल कर लोगों को उकसाया गया था।

WhatsApp ग्रुप की भूमिका और साजिश

जांच के दौरान पुलिस को कई संदिग्ध WhatsApp ग्रुप मिले हैं, जो सीधे तौर पर हिंसा को हवा देने से जुड़े नजर आ रहे हैं। इनमें 'चलो संसद' और 'JNU संसद चलो कोआर्डिनेशन' जैसे नाम सामने आए हैं। इन ग्रुपों में प्रदर्शनकारियों को भड़काने वाली सामग्री साझा की जा रही थी। यहां तक कि इन समूहों में 'प्रदर्शनकारी की मौत होने पर सरकार पर बनेगा दबाव' जैसे आपत्तिजनक संदेश भी भेजे गए। दिल्ली पुलिस अब उन सभी व्यक्तियों की पहचान कर रही है जिन्होंने इन ग्रुपों में इस तरह के भड़काऊ पोस्ट किए थे।

सोमवार को हुई इस हिंसक झड़प के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति काफी गंभीर रही है। इस घटना में 6 IPS अधिकारियों समेत कुल 118 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इसके अलावा पुलिस की 20 से ज्यादा गाड़ियों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया। वहीं प्रदर्शन के दौरान लगभग 60 प्रदर्शनकारियों के भी घायल होने की खबर है। पुलिस लगातार सीसीटीवी फुटेज के जरिए कानून तोड़ने वालों के चेहरे पहचानने की प्रक्रिया में जुटी है ताकि किसी भी दोषी को बख्शा न जाए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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