राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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दिल्ली में मापतोल व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव
दिल्ली के बाजारों में अब दुकानदारों के तराजू से लेकर पेट्रोल पंपों के ईंधन डिस्पेंसर तक सब कुछ सख्त निगरानी के दायरे में आने वाला है। दिल्ली सरकार का विधिक माप विज्ञान विभाग वजन और माप से जुड़े उपकरणों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए एक नई कार्ययोजना पर काम कर रहा है। इसके लिए सरकार ने दिल्ली विधिक माप विज्ञान (सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2026 का एक मसौदा तैयार किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को मिलने वाली सेवाओं और सामान की मात्रा में होने वाली धांधली को पूरी तरह से रोकना है।
निजी संस्थानों को मिलेगी टेस्टिंग की जिम्मेदारी
इस नई व्यवस्था के तहत सरकार केवल अपने विभाग पर निर्भर नहीं रहेगी। सरकार ऐसी निजी कंपनियों, फर्मों और संस्थानों को मान्यता देगी जो सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र के रूप में कार्य करेंगी। ये केंद्र दुकानों, अस्पतालों और अन्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की गहन जांच करेंगे। इन जांचों का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को मिलने वाली वस्तु या सेवा की माप में कोई त्रुटि न हो। यदि कोई परीक्षण केंद्र निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है या जांच में लापरवाही बरतता है, तो सरकार उसके लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निलंबित या रद्द करने का अधिकार रखती है।
इन उपकरणों की होगी अनिवार्य जांच
सरकार द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाले कई महत्वपूर्ण उपकरणों को इस नए दायरे में शामिल किया गया है। इन उपकरणों की नियमित जांच से पारदर्शिता आएगी। प्रमुख रूप से निम्नलिखित उपकरणों की निगरानी की जाएगी:
- दुकानों पर उपयोग किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक कांटे और सामान्य तराजू।
- पेट्रोल, डीजल और सीएनजी (CNG) पंपों पर लगे डिस्पेंसर मशीनें।
- घरों और उद्योगों में पानी की खपत मापने वाले मीटर।
- बिजली की खपत दर्शाने वाले मीटर।
- वाहनों की रफ्तार मापने वाले स्पीडोमीटर।
- अस्पतालों में रक्तचाप (बीपी) मापने वाली मशीनें।
- चिकित्सीय उपयोग में आने वाले थर्मामीटर।
उपभोक्ताओं को मिलेगी शुद्धता की गारंटी
ग्राहकों के लिए यह समझना और भी आसान हो जाएगा कि वे जिस मशीन का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह सरकारी मानकों पर खरी उतरती है या नहीं। जांच में सही पाए जाने वाले प्रत्येक उपकरण पर एक विशेष सत्यापन चिह्न या मोहर लगाई जाएगी। इस चिह्न पर जीएनसीटीडी (GNCTD) और संबंधित परीक्षण केंद्र का एक विशिष्ट कोड अंकित होगा। यह कोड इस बात का सबूत होगा कि उपकरण की जांच सरकारी मानकों के अनुरूप हो चुकी है और उसमें किसी प्रकार की हेरफेर की संभावना नहीं है। इसके अलावा, उपकरणों को उनके जोखिम के स्तर के आधार पर उच्च, मध्यम और कम जोखिम वाली श्रेणियों में भी बांटा जाएगा।
परीक्षण केंद्र खोलने की प्रक्रिया और शुल्क
सरकार ने इस नई सेवा को शुरू करने के लिए शुल्क का भी निर्धारण किया है। नए ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र का लाइसेंस लेने के लिए 2.5 लाख रुपये का शुल्क प्रति उपकरण प्रति वर्ष देना होगा। यह कदम बाजार में व्याप्त मापतोल संबंधी विसंगतियों को दूर करने के लिए उठाया गया है।
आम जनता से मांगे गए सुझाव
सरकार ने इस मसौदे पर आम नागरिकों और संबंधित पक्षों से प्रतिक्रिया मांगी है। कोई भी व्यक्ति या संस्था अधिसूचना जारी होने के 10 दिनों के भीतर अपने सुझाव या आपत्तियां दर्ज करा सकती है। सुझाव भेजने के लिए पता है: कंट्रोलर, विधिक माप विज्ञान विभाग, प्लॉट नंबर-17, इंस्टीट्यूशनल एरिया, विश्वास नगर, नई दिल्ली-110032। इसके अलावा, इच्छुक व्यक्ति अपने सुझाव आधिकारिक ईमेल पते controllerwmd@gmail.com पर भी भेज सकते हैं। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि दिल्ली में ग्राहकों को जो भी सामान या सेवा मिले, उसकी माप सटीक हो और उसमें गड़बड़ी की कोई गुंजाइश न रहे।
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