दिल्ली
एक घंटा पहले
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विचारों
सम्मान का ऐतिहासिक क्षण
दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने न्यायपालिका और कानून के क्षेत्र में भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्हें इंटरनेशनल IP हॉल ऑफ़ फ़ेम 2026 में जगह दी गई है। इस सम्मान के साथ ही, वह इस सूची में शामिल होने वाली देश की पहली भारतीय जज बन गई हैं। उन्हें यह गौरव 16 जून को अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया स्थित सैन डिएगो में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया गया।
बौद्धिक संपदा कानून में असाधारण योगदान
जस्टिस प्रतिभा सिंह को यह सम्मान भारत में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी यानी बौद्धिक संपदा कानून के क्षेत्र में उनके बेहतरीन और महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है। भारत, जो कि दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती इनोवेशन अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है, वहां IP कानून को अधिक स्पष्ट, विश्वसनीय और विकसित बनाने में जस्टिस सिंह ने अहम भूमिका निभाई है।
वैश्विक स्तर पर सराहना
IAM की संपादक रेचल माउंटेन ने जस्टिस प्रतिभा सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका प्रभाव केवल कोर्टरूम तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने भारत की राष्ट्रीय IPR पॉलिसी को आकार देने में भी बड़ी भूमिका निभाई है। वर्तमान में, वह WIPO के जजों के एडवाइजरी बोर्ड की चेयरपर्सन के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। उल्लेखनीय है कि IAM एक प्रमुख IP प्रकाशन है जो वर्ष 2006 से लगातार हर साल IP हॉल ऑफ़ फ़ेम के नामों की घोषणा कर रहा है।
क्या बोले जस्टिस प्रतिभा सिंह
इस बड़े सम्मान को प्राप्त करने के बाद जस्टिस प्रतिभा ने IAM के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे एक विनम्र अनुभव बताते हुए अपना यह अवॉर्ड अपने परिवार, दोस्तों, दिल्ली हाई कोर्ट और पूरे भारत को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह नामांकन IP के क्षेत्र में भारत के वैश्विक नेतृत्व की पहचान है।
इंटरनेशनल IP हॉल ऑफ़ फ़ेम की प्रक्रिया
- यह सम्मान उन विशेषज्ञों को दिया जाता है जिन्होंने IP कानून के विकास में अभूतपूर्व कार्य किए हों।
- इसमें चयन के लिए एक बेहद कठिन नामांकन और पीयर-रिव्यू प्रक्रिया अपनाई जाती है।
- इस चयन प्रक्रिया में वैश्विक IP कम्युनिटी की सक्रिय भागीदारी होती है।
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