बिहार
2 घंटे पहले
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यूरोपीय वास्तुकला की अनूठी मिसाल
दरभंगा महाराज की दानवीरता और उनकी भव्य जीवनशैली के किस्से आज भी मिथिलांचल में चर्चा का विषय रहते हैं। उन्होंने अपने शासनकाल में कई आलीशान भवनों, शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों का निर्माण करवाया था, जो आज भी राज्य की धरोहर बने हुए हैं। इन्हीं में से एक बेहद खास महल है बेला पैलेस। इस महल को महाराज ने अपने छोटे भाई के लिए एक विशेष यूरोपीय शैली में तैयार करवाया था। महल के ऊंचे गुंबद, विशाल झरोखे और बेल्जियम के कांच की चमक इसे दूर से देखने पर किसी यूरोपीय किले जैसा अनुभव कराती है।
केंद्र सरकार के नियंत्रण में संचालन
दरभंगा महाराज के अन्य महलों के विपरीत बेला पैलेस की एक अलग पहचान यह है कि यह सीधे केंद्र सरकार के अधीन है। दरभंगा के पूर्व सांसद और केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण सिंह के विशेष प्रयासों से यह भवन महाराज से अधिकृत होकर भारत सरकार को प्राप्त हुआ था। वर्तमान में इस ऐतिहासिक इमारत में पोस्टल ट्रेनिंग सेंटर यानी डाक प्रशिक्षण केंद्र संचालित हो रहा है।
देश के छह राज्यों के कर्मियों का प्रशिक्षण केंद्र
इस परिसर में होने वाली गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए राम स्वार्थ सिंह बताते हैं कि यह संस्थान देश के विभिन्न राज्यों के डाककर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां मुख्य रूप से 6 राज्यों के कर्मचारी ट्रेनिंग लेने आते हैं, जिनमें बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर के राज्य शामिल हैं। यहाँ आने वाले प्रशिक्षु आधुनिक डाक व्यवस्था, कंप्यूटर प्रणाली, मनीऑर्डर और पार्सल प्रबंधन का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।
दानवीरता की अनूठी विरासत
दरभंगा महाराज ने अपने कई महलों को जनकल्याण के लिए दान कर दिया था, जिनमें आनंदबाग, राजकिला और नविलाखा पैलेस शामिल हैं। इन स्थानों पर आज विश्वविद्यालय और अस्पताल चल रहे हैं। बेला पैलेस भी उसी दानशीलता की एक जीवंत निशानी है, जो अपने भाई के आराम के लिए बनवाया गया था और आज राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे रहा है। जब युवा प्रशिक्षु इस महल की ऐतिहासिक दीवारों के बीच पहुंचते हैं, तो उन्हें मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का स्पष्ट अहसास होता है।
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