मानसून में लगाएं ये 100 पेड़, 20 साल में बन जाएंगे करोड़पति झारखंड 2 महीने पहले 90
झारखंड के पलामू जिले में किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ महोगनी और सागवान की खेती पर जोर दे रहे हैं। सही देखभाल के साथ यह निवेश भविष्य में लाखों-करोड़ों का रिटर्न दे सकता है।

मानसून के दौरान करें इमारती पेड़ों का रोपण

झारखंड में मानसून का आगमन हो चुका है और किसान खेतों में फसलों की बुआई की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, यह समय केवल पारंपरिक फसलों के लिए ही नहीं, बल्कि मूल्यवान इमारती पेड़ों को लगाने के लिए भी सबसे बेहतर है। कृषि विशेषज्ञों और अनुभवी किसानों का मानना है कि महोगनी और सागवान जैसे वृक्ष भविष्य के लिए एक बेहतरीन आर्थिक निवेश साबित हो सकते हैं।

महोगनी की खेती का गणित

पलामू जिले के किसान तारकेश्वर सिंह चेरो के अनुसार, महोगनी देश की सबसे कीमती इमारती लकड़ियों में से एक है। इसकी मांग फर्नीचर उद्योग, जहाज निर्माण और सजावटी सामान बनाने में हमेशा बनी रहती है। यदि किसान अपनी एक एकड़ जमीन पर 100 महोगनी के पौधे लगाते हैं और उनका उचित ध्यान रखते हैं, तो 20 से 25 साल की अवधि में यह लाखों-करोड़ों रुपये की संपत्ति बन सकते हैं।

शुरुआती देखभाल है जरूरी

इन पेड़ों को तैयार करने के लिए शुरुआती 2 से 3 साल तक विशेष निगरानी की जरूरत होती है। इस दौरान नियमित सिंचाई और सुरक्षा सुनिश्चित करने से पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है। एक बार पेड़ थोड़े बड़े और मजबूत हो जाएं, तो इनकी देखभाल का खर्च और मेहनत काफी कम हो जाती है। सबसे बड़ी राहत यह है कि महोगनी के पेड़ों के नीचे खरपतवार की समस्या भी बहुत कम होती है।

भविष्य की सुरक्षा और पर्यावरण का लाभ

इमारती लकड़ी की कीमतों में निरंतर हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए इसे एक सुरक्षित निवेश माना जा रहा है। किसान अब अपने खेतों में सागवान और महोगनी दोनों का मिश्रण लगाकर लाभ कमा रहे हैं। यह न केवल भविष्य के लिए आर्थिक मजबूती का जरिया है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। मानसून का मौसम पौधारोपण के लिए सबसे अनुकूल होता है, इसलिए किसान अभी से योजना बनाकर अपने और अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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