धर्म
4 घंटे पहले
5
विचारों
कालाष्टमी का धार्मिक महत्व और तिथियां
हिंदू धर्म में हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र और उग्र स्वरूप माने जाने वाले भगवान काल भैरव की पूजा का विशेष विधान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से काल भैरव की आराधना करते हैं, उन्हें जीवन में आने वाले सभी प्रकार के भय, संकट और नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा प्राप्त होती है।
ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 4 सितंबर 2026 को सुबह 02:25 बजे हो रही है। यह तिथि 5 सितंबर 2026 को रात 12:13 बजे तक प्रभावी रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के चलते कालाष्टमी का व्रत 4 सितंबर 2026, दिन शुक्रवार को रखा जाएगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि कालाष्टमी का दिन आध्यात्मिक साधना और विशेष उपायों को करने के लिए अत्यंत फलदायी होता है। इस दिन किए गए अनुष्ठान व्यक्ति के जीवन में आ रही तमाम बाधाओं को दूर करने की शक्ति रखते हैं।
काल भैरव को प्रसन्न करने के 5 विशेष उपाय
यदि आप अपने जीवन में सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करते हैं, तो कालाष्टमी के दिन इन पांच उपायों को अपनाना बेहद प्रभावी साबित हो सकता है:
- नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा: कालाष्टमी के दिन किसी भी भैरव मंदिर जाकर उनके चरणों में अर्पित सिंदूर का थोड़ा सा हिस्सा लें। इसे एक काले धागे पर लगाएं और ‘ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद इस धागे को अपने गले में या दाहिने हाथ की कलाई में धारण कर लें। माना जाता है कि यह उपाय बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से बचाव करता है।
- बाधाओं का निवारण: अगर आपके जीवन में लगातार किसी न किसी चीज का अभाव बना हुआ है, तो भगवान भैरव के चरणों में एक काला धागा अर्पित करें। पांच मिनट तक बाबा का ध्यान करने के पश्चात इस धागे को अपने दाहिने पैर में बांध लें। मान्यता है कि इससे जीवन में आने वाली रुकावटें स्वतः ही दूर होने लगती हैं।
- स्वास्थ्य लाभ के लिए: यदि आप लंबे समय से किसी बीमारी से जूझ रहे हैं या जीवन में परेशानी कम नहीं हो रही है, तो सरसों के तेल से चुपड़ी हुई रोटी किसी काले कुत्ते को खिलाएं। खिलाते समय मन ही मन काल भैरव का स्मरण करें, इससे स्वास्थ्य संबंधी कष्टों में राहत मिलती है।
- सुख-समृद्धि और शांति: धन-धान्य और सुख-सुविधाओं की प्राप्ति के लिए मिट्टी के दीपक में सरसों का तेल डालकर जलाएं और भैरव मंत्र का जाप करें। यदि परिवार में आपसी तनाव या क्लेश की स्थिति है, तो स्नान करने के उपरांत शिवजी के समक्ष बैठकर पूरी निष्ठा के साथ शिव चालीसा का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
- प्रेम जीवन और शनि कृपा: कालाष्टमी के दिन उड़द की दाल का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। चूंकि उड़द की दाल का संबंध शनि देव से भी है, इसलिए इस दिन दान करने से शनि देव की कृपा भी प्राप्त होती है। साथ ही, यह उपाय प्रेम जीवन में आ रही समस्याओं को समाप्त कर संबंधों में मधुरता लाता है।
इन उपायों को पूर्ण विश्वास के साथ करने से भक्तों को भगवान काल भैरव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।
Comments
0 comment