धनिया की खेती करने वाले किसानों के लिए खुशखबरी, बिहार सरकार की इस योजना से मिलेगी मोटी सब्सिडी बिहार 2 महीने पहले 76
बिहार सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए 'बीज मसाला योजना' की शुरुआत की है, जिसके तहत धनिया समेत अन्य मसालों की खेती पर सरकार 40 प्रतिशत तक की आर्थिक मदद दे रही है।

खेती से बढ़ेगी किसानों की कमाई

बिहार के किसानों के लिए अब परंपरागत फसलों के अलावा मसालों की खेती करना एक मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है। राज्य सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने और राज्य में मसाला उत्पादन को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से एक विशेष योजना शुरू की है, जिसे बीज मसाला योजना का नाम दिया गया है। इस योजना के माध्यम से सरकार किसानों को धनिया और अन्य मसालों की खेती करने के लिए सीधे तौर पर आर्थिक सहायता या सब्सिडी प्रदान कर रही है। गया जिले की जिला उद्यान पदाधिकारी तबस्सुम परवीन ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो किसान धनिया के साथ-साथ मेथी, मंगरैल, अजवाइन और सौंफ जैसी फसलों को उगाना चाहते हैं, वे इस सरकारी योजना का लाभ उठाकर अपनी खेती को अधिक लाभदायक बना सकते हैं।

सब्सिडी का पूरा गणित

इस योजना के तहत वित्तीय सहायता का ढांचा काफी सरल रखा गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सरकार ने इन मसाला फसलों के लिए प्रति हेक्टेयर इकाई लागत 50 हजार रुपये निर्धारित की है। इस निर्धारित लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार सब्सिडी के रूप में किसानों को वापस देगी, जो कि प्रति हेक्टेयर 20 हजार रुपये की राशि होती है। इस कदम का सीधा असर यह होगा कि किसानों को खेती में होने वाले शुरुआती खर्च का बड़ा बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। सरकार का मुख्य लक्ष्य मसाला खेती के रकबे को बढ़ाना और किसानों को नई फसलों की ओर प्रोत्साहित करना है ताकि वे पारंपरिक खेती के सीमित दायरे से बाहर निकलकर बेहतर कमाई कर सकें।

गया जिले में विशेष क्लस्टर मॉडल

योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए गया जिले में विशेष रणनीति अपनाई गई है। यहाँ धनिया की खेती के लिए 50 हेक्टेयर का कुल लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए खेती को क्लस्टर आधारित मॉडल के जरिए संपन्न कराया जाएगा। जिले में इसके लिए दो अलग-अलग क्लस्टर बनाए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक क्लस्टर 25 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला होगा। इस मॉडल के पीछे सरकार का मकसद किसानों को न केवल वित्तीय मदद देना है, बल्कि उन्हें समय पर तकनीकी सहायता और खेती के बेहतर प्रबंधन के गुर भी सिखाना है।

समय और उत्पादन का संतुलन

गया के ननौक गांव में धनिया की खेती पहले से ही एक बड़े स्तर पर हो रही है। यहाँ के किसानों का अनुभव यह बताता है कि वे आमतौर पर बीज उत्पादन के बजाय धनिया की पत्तियों को बाजार में बेचकर तुरंत मुनाफा कमाना पसंद करते हैं। धनिया की पत्ती वाली फसल को बाजार में बेचने योग्य तैयार होने में महज 30 दिन का समय लगता है। वहीं, अगर कोई किसान बीज उत्पादन करना चाहता है, तो उसे फसल के लिए लगभग तीन महीने तक का इंतजार करना पड़ता है। यही कारण है कि कई किसान जल्दी नकदी प्राप्त करने के लिए पत्ती उत्पादन को प्राथमिकता देते हैं।

कैसे करें आवेदन और कहाँ मिलेगा सहयोग

यदि आप भी इस योजना का लाभ उठाने के इच्छुक हैं, तो आपको ऑनलाइन प्रक्रिया का पालन करना होगा। आवेदन करने के लिए किसानों को बिहार सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। पंजीकरण के बाद, पात्रता की जांच की जाएगी और नियमों के मुताबिक सब्सिडी की राशि सीधे किसानों के खाते में उपलब्ध कराई जाएगी। यदि किसी किसान को आवेदन प्रक्रिया को लेकर कोई दुविधा हो या योजना के बारे में अधिक जानकारी की आवश्यकता हो, तो वह अपने जिले के कृषि विभाग या उद्यान विभाग के कार्यालय में जाकर सीधे संपर्क कर सकता है। वहाँ के अधिकारी किसानों को पूरी प्रक्रिया और तकनीकी सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान करेंगे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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