UPI पर शुल्क के मुद्दे पर उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान, मोदी सरकार के पक्ष में दिया यह तर्क जम्मू-कश्मीर एक घंटा पहले 4
यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेन-देन पर शुल्क को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार का समर्थन किया है।

यूपीआई शुल्क मामले में उमर अब्दुल्ला का रुख

यूपीआई पर शुल्क लगाने के हालिया फैसले को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक अहम बयान दिया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान की व्यवस्था को सुचारू रूप से बनाए रखना और इसके बुनियादी ढांचे का संचालन करना बेहद खर्चीला काम है। हालांकि, उन्होंने सरकार को यह भी सुझाव दिया कि इस पूरी प्रक्रिया में खुदरा और आम ग्राहकों के हितों का विशेष रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए।

शुल्क के गणित पर क्या बोले मुख्यमंत्री

उमर अब्दुल्ला ने साफ किया कि यह नया शुल्क हर उपभोक्ता के लिए नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी पीटू-पी लेन-देन पर किसी भी तरह का कोई शुल्क लागू नहीं होगा। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि सामान्य ग्राहकों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उन पर यह शुल्क तब तक नहीं लगेगा जब तक वे एक निश्चित सीमा से अधिक का लेन-देन नहीं करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक कोई चीज पूरी तरह से मुफ्त मिलती है, तब तक अक्सर उसकी उपयोगिता और लागत का अंदाजा नहीं होता है।

कंपनियों की कमाई पर रखी राय

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सरकार बड़ी कंपनियों या व्यापारियों से शुल्क वसूलती है, तो इसमें उन्हें कोई समस्या नजर नहीं आती। उनका तर्क है कि डिजिटल भुगतान के जरिए ये कंपनियां पहले ही काफी मुनाफा कमा रही हैं। उन्होंने दोहराया कि भुगतान प्रणाली के संचालन में आने वाला भारी खर्च सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है, इसलिए यदि कंपनियों पर थोड़ा बोझ पड़ता है तो उसे गलत नहीं माना जा सकता।

राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच तकरार

यूपीआई के मुद्दे पर विपक्ष की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। राहुल गांधी ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकने के बजाय अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए और इस निर्णय को तुरंत वापस लेना चाहिए।

इस बयान पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी को हर छोटी-बड़ी बात में अमेरिका का साया दिखता है और वे कभी भी राष्ट्र निर्माण के सकारात्मक मुद्दों पर चर्चा नहीं करते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया कि यह नया शुल्क केवल उन चुनिंदा व्यापारियों पर लागू होगा जिनका मासिक यूपीआई लेन-देन एक लाख रुपये से अधिक है। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे व्यापारियों की संख्या कुल व्यापारियों के मुकाबले मात्र चार प्रतिशत है।

कानूनी पचड़े में मामला

इस पूरे घटनाक्रम और यूपीआई शुल्क के विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है, जहां इस पर आगे की सुनवाई होनी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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