दिल्ली
एक घंटा पहले
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दिल्ली पुलिस का सख्त रुख
कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के नेताओं के लिए मुसीबतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के तीन प्रमुख चेहरे, सौरभ दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे, कानूनी घेरे में आ गए हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इन तीनों नेताओं को आधिकारिक जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए समन भेजा है। इस निर्देश के अनुसार, इन तीनों नेताओं को 22 अक्टूबर को क्राइम ब्रांच के कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी है।
क्राइम ब्रांच की ओर से मिला नोटिस
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब सौरभ दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल से रिहा होकर बाहर आए, तो उसी दिन यानी बुधवार रात लगभग 8:30 बजे उन्हें दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा औपचारिक नोटिस सौंपा गया। इस नोटिस के माध्यम से उन्हें निर्देशित किया गया कि वे जांच में अपना सहयोग दें। इसी कड़ी में सीजेपी के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे को भी पूछताछ के लिए क्राइम ब्रांच ने बुलाया है।
क्या है पूरा मामला
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इन नेताओं को मुख्य रूप से धारा 188 के उल्लंघन के आरोप में तलब किया है। उन पर सरकारी आदेशों का पालन न करने और किसी अन्य की संपत्ति में अनधिकृत रूप से प्रवेश कर जंतर-मंतर पहुंचने का आरोप है। पुलिस अब इन नेताओं से पूछताछ करेगी, जिसके बाद ही मामले की आगामी कानूनी प्रक्रिया और जांच की दिशा स्पष्ट हो पाएगी।
एसईएम कोर्ट से मिली थी रिहाई
गौरतलब है कि 14 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के कारण ये नेता कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे थे। न्यायिक हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद, बुधवार को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने सौरभ दास और आशुतोष रांका को रिहा करने का निर्देश दिया था। अदालत में सुनवाई के दौरान उनके जमानतदारों के आवश्यक दस्तावेज भी जमा किए गए थे। इन नेताओं को जंतर-मंतर के गैर-अधिसूचित क्षेत्र में प्रवेश करने और शांति भंग न करने के लिए भरे गए बॉन्ड का उल्लंघन करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था और शुरुआत में इन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
हिरासत की अवधि में हुई थी बढ़ोतरी
कानूनी पेचीदगियां उस समय और बढ़ गईं जब 19 अक्टूबर को अदालत ने उनकी हिरासत को दो और दिनों के लिए बढ़ा दिया था, जो बुधवार को खत्म हुई। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी हस्तक्षेप करने से मना कर दिया था। अदालत ने इन नेताओं को सुझाव दिया था कि वे एसईएम के समक्ष होने वाली सुनवाई के परिणाम का इंतजार करें और यदि वे इस निर्णय से असंतुष्ट हैं, तो वे अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
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