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एक घंटा पहले
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साउथ चाइना सी में बढ़ता तनाव
साउथ चाइना सी में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए चीन की आक्रामक नीतियां लगातार विवादों का केंद्र बनी हुई हैं। ताजा घटनाक्रम में फिलीपींस द्वारा अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ किए गए एक नौसैनिक युद्धाभ्यास ने चीन को आगबबूला कर दिया है। चीन की पीएलए साउदर्न थिएटर कमांड ने इसे लेकर फिलीपींस पर तीखा हमला बोला है। चीन की सेना का कहना है कि मनीला बाहरी देशों के साथ मिलकर इलाके की शांति और स्थिरता को दांव पर लगा रहा है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच फिलीपींस द्वारा भारत से खरीदी गई ब्रह्मोस मिसाइलों की तैनाती की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है, जिसने बीजिंग की चिंताएं कई गुना बढ़ा दी हैं।
युद्धाभ्यास का ब्योरा और चीन की आपत्तियां
फिलीपींस ने हाल ही में वेस्ट फिलीपींस सी में अपनी 19वीं मल्टीलेटरल मैरीटाइम को-ऑपरेटिव एक्टिविटी सफलतापूर्वक पूरी की है। यह युद्धाभ्यास 19 अगस्त से 25 अगस्त के बीच आयोजित किया गया था। इस सैन्य अभ्यास में फिलीपींस के साथ-साथ अमेरिकी पैसिफिक कमांड और ऑस्ट्रेलियाई डिफेंस फोर्स ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। इस दौरान जटिल समुद्री और हवाई ऑपरेशंस का प्रदर्शन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य देशों के बीच मैरीटाइम इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करना था।
इस अभ्यास में फिलीपींस ने अपने एफए-50 फाइटर जेट्स और एडब्ल्यू109 हेलीकॉप्टर्स का इस्तेमाल किया। दूसरी ओर, अमेरिका ने अपना युद्धपोत यूएसएस सांता बारबरा और पी-8ए पोसीडॉन निगरानी विमान तैनात किया था। ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने नौसैनिक जहाजों और हेलीकॉप्टर्स के साथ इस युद्धाभ्यास में सहयोग किया। इतनी बड़ी विदेशी सैन्य मौजूदगी ने चीन को अपनी क्षेत्रीय समुद्री चौधराहट के लिए सीधा खतरा महसूस करा दिया है।
चीन की तीखी प्रतिक्रिया
युद्धाभ्यास के समापन के साथ ही बीजिंग से आक्रामक बयान आने शुरू हो गए। पीएलए साउदर्न थिएटर कमांड के प्रवक्ता झाई शिचेन ने कड़े शब्दों में कहा कि चीन की सेना ने भी 21 से 25 अगस्त के बीच क्षेत्र में अपनी रूटीन पेट्रोलिंग जारी रखी। उन्होंने फिलीपींस पर साउथ चाइना सी में जानबूझकर अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया। झाई ने स्पष्ट कहा कि फिलीपींस बाहरी ताकतों को बुलाकर शांति भंग कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि चीन अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री अधिकारों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है और वे किसी भी विदेशी दखल को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। चीन के इस रुख से इलाके में किसी भी समय बड़े सैन्य टकराव की आशंका जताई जा रही है।
भारत की ब्रह्मोस मिसाइल से बदलता पावर बैलेंस
चीन की बौखलाहट का एकमात्र कारण अमेरिकी युद्धाभ्यास ही नहीं है, बल्कि फिलीपींस द्वारा अपनी कोस्टल डिफेंस प्रणाली को आधुनिक बनाना भी है। भारत से खरीदी गई ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का तीसरा और अंतिम बैच अगस्त के अंत तक फिलीपींस पहुंचने की उम्मीद है। इसके लिए आवश्यक लॉन्चर और ट्रांसपोर्टर वाहन भारत में पूरी तरह तैयार किए जा चुके हैं।
तीन बैटरी वाली यह ब्रह्मोस फोर्स पूरी तरह से मोबाइल है, जो इसे दुश्मन के लिए एक खतरनाक चुनौती बनाती है। यह प्रणाली वेस्ट फिलीपींस सी में किसी भी दुश्मन के जहाज को पलक झपकते ही तबाह करने की क्षमता रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस की सुपरसोनिक गति के कारण दुश्मन के राडार के लिए इसे ट्रैक करना और इसे बीच रास्ते में रोकना बेहद कठिन काम है। इस मिसाइल की तैनाती से साउथ चाइना सी में सामरिक पावर बैलेंस तेजी से फिलीपींस के पक्ष में झुकता दिखाई दे रहा है, जिससे चीनी नौसेना की मुश्किलें आने वाले समय में बढ़ना तय है। फिलीपींस इन चुनौतियों के बावजूद अपनी रक्षा नीतियों को लेकर पूरी तरह अडिग है।
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