"3 से 4 वरिष्ठ वकील माहौल खराब कर रहे हैं" — पूर्व सिविल जज के मामले में CJI सूर्यकांत ने जताई कड़ी नाराजगी राष्ट्रीय राजनीति 2 घंटे पहले 6
सुप्रीम कोर्ट में पूर्व सिविल जज अमरीश कुमार जैन की याचिका पर सुनवाई के दौरान CJI जस्टिस सूर्यकांत ने 3 से 4 तथाकथित वरिष्ठ वकीलों को न्यायिक प्रक्रिया में व्यवधान डालने का जिम्मेदार ठहराया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की चार पीठों द्वारा सुनवाई से किनारा करने के बाद यह मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा, जहां नई खंडपीठ गठित करने का आदेश दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में असाधारण सुनवाई

सर्वोच्च न्यायालय के इतिहास में शायद ही कोई ऐसा मामला आया हो जिसमें एक ही हाईकोर्ट की चार-चार पीठें सुनवाई से खुद को अलग कर लें। पूर्व सिविल जज अमरीश कुमार जैन की याचिका के साथ ठीक यही हुआ। इस असाधारण स्थिति के बाद मामला अंततः सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां बुधवार को भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई की और कड़े निर्देश जारी किए।

क्या है पूर्व सिविल जज का मामला?

अमरीश कुमार जैन ने नवंबर 2005 में पंजाब ज्यूडिशियल सर्विसेज में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के रूप में अपनी सेवाएं आरंभ की थीं। वर्ष 2009 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की प्रशासनिक अनुशंसाओं के आधार पर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। जैन का आरोप था कि वर्ष 2007 में जालंधर के तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश उनके प्रति पूर्वाग्रह रखते थे और इसी कारण उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज की गईं।

पहली बहाली, फिर दूसरी बर्खास्तगी

वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद अक्टूबर 2018 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जैन के पक्ष में निर्णय देते हुए उन्हें सेवा में पुनः बहाल करने का आदेश सुनाया। अदालत ने वरिष्ठता, सेवा की निरंतरता, वेतनवृद्धि और पदोन्नति जैसे समस्त लाभ दिलाने का निर्देश दिया, हालांकि बकाया वेतन देने से इनकार किया गया। जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के इस फैसले को बरकरार रखा और मार्च 2019 में जैन को दोबारा पद पर नियुक्त कर दिया गया।

परंतु यह राहत अधिक समय तक नहीं टिकी। मार्च 2022 में हाईकोर्ट के प्रशासनिक पक्ष ने एक बार फिर उनकी सेवा समाप्त करने की सिफारिश की और 18 अप्रैल 2022 को उन्हें दोबारा पद से हटा दिया गया। जैन का कहना है कि इस कार्रवाई ने न केवल उनका रोजगार छीना, बल्कि वे पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से भी वंचित हो गए।

चार पीठों ने किया मामले से किनारा

जैन ने इस दूसरी बर्खास्तगी को हाईकोर्ट में चुनौती दी, किंतु एक के बाद एक चार अलग-अलग पीठों ने इस याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। सबसे पहले जस्टिस लिसा गिल ने मामले से दूरी बनाई। इसके बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने 6 महीने तक फैसला सुरक्षित रखने के बाद मामले से हाथ खींच लिए। तदनंतर जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा तथा जस्टिस दीपक सिब्बल की पीठ ने भी सुनवाई से इनकार कर दिया। इस असामान्य स्थिति के चलते मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक जा पहुंचा।

CJI की वरिष्ठ वकीलों पर तीखी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान CJI जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 3 से 4 तथाकथित वरिष्ठ वकील ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न कर रहे हैं जिनके कारण जज बार-बार मामले से स्वयं को अलग करने पर विवश होते हैं। उन्होंने कहा कि वे इस पूरे मामले पर स्वयं करीबी नजर रखे हुए हैं। साथ ही उन्होंने अमरीश कुमार जैन को यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी ओर से किसी प्रकार की अनुचित गतिविधि या शरारत की गई तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। CJI ने सुझाव दिया कि जैन अपना पक्ष स्वयं न्यायालय के समक्ष रखें। इस पर जैन ने बताया कि वे पहले भी दो पीठों के सामने खुद बहस कर चुके हैं और आगे भी ऐसा करने के लिए तैयार हैं।

पेंशन के लिए आवेदन भी रहा अस्वीकृत

सुनवाई के दौरान जैन ने न्यायालय को यह भी बताया कि उन्होंने वर्ष 2024 में अपने पेंशन संबंधी लाभ जारी करने के लिए आवेदन किया था क्योंकि वे अपने बेटे की एलएलबी की अंतिम वर्ष की फीस जमा करना चाहते थे, परंतु यह आवेदन भी स्वीकार नहीं किया गया। जैन अपने अधिवक्ता अभय प्रताप सिंह के साथ अदालत में उपस्थित हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और आगे की राह

सर्वोच्च न्यायालय ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को तत्काल दो न्यायाधीशों की एक खंडपीठ गठित करने का निर्देश दिया है, जो जैन की याचिका की सुनवाई करे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित न्यायाधीशों को किसी भी परिस्थिति में मामले से खुद को अलग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मामले की सुनवाई प्रतिदिन के आधार पर हो और 13 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में इसे अंतिम रूप से सुना जाए। इसके अतिरिक्त हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को सुनवाई पूरी होने और फैसला सुरक्षित रखे जाने के पश्चात अनुपालन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करने को कहा गया है।

इस प्रकार दो दशक से अधिक समय से चला आ रहा यह विवाद अब नए सिरे से हाईकोर्ट की विशेष पीठ के समक्ष सुना जाएगा, जिसकी निगरानी स्वयं सर्वोच्च न्यायालय करेगा।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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