छत्तीसगढ़ में कारोबार शुरू करना होगा और भी सरल, कैबिनेट ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक को दी हरी झंडी छत्तीसगढ़ एक महीने पहले 73
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने और निवेश को आसान बनाने के लिए छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। इस नए कदम से निवेशकों को जटिल सरकारी प्रक्रियाओं और कागजी काम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

व्यापारिक माहौल को नई दिशा देने की तैयारी

छत्तीसगढ़ में उद्योग लगाने और निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार ने एक बड़ा ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हाल ही में संपन्न हुई कैबिनेट की बैठक में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनियमन-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक 2026 के मसौदे को मंजूरी प्रदान की गई है। सरकार का यह प्रयास है कि राज्य में व्यापार शुरू करने से लेकर उसे संचालित करने तक की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और डिजिटल बनाई जाए, जिससे निवेशकों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

देश का पहला राज्य बनने की राह पर छत्तीसगढ़

सरकार की ओर से दावा किया गया है कि इस तरह का विशिष्ट विधेयक लाने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा। इस नए कानून के पीछे मुख्य उद्देश्य व्यापारिक गतिविधियों में आने वाली पुरानी और जटिल कागजी औपचारिकताओं को जड़ से खत्म करना है। वर्तमान में निवेशकों को विभिन्न सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिसे देखते हुए इस विधेयक में प्रक्रियाओं को समयबद्ध बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इससे काम में न केवल गति आएगी, बल्कि पूरी व्यवस्था में जवाबदेही भी सुनिश्चित हो सकेगी।

क्या-क्या बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे?

इस विधेयक के लागू होने के बाद राज्य में कारोबारी माहौल में व्यापक सुधार आने की उम्मीद है। इसके तहत निम्नलिखित प्रमुख सुधारों को शामिल किया गया है:

  • डीम्ड परमिशन: यदि कोई निवेशक तय समय सीमा के भीतर किसी सरकारी विभाग से एनओसी या आवश्यक मंजूरी हासिल नहीं कर पाता है, तो एक निश्चित अवधि के बाद उसे स्वतः ही मंजूरी प्राप्त मान लिया जाएगा।
  • स्व-प्रमाणीकरण और तृतीय-पक्ष सत्यापन: अनुपालन के लिए अब निवेशकों को खुद से प्रमाण देने और तीसरे पक्ष के सत्यापन की सुविधा मिलेगी, जिससे अनावश्यक देरी कम होगी।
  • डबल लाइसेंसिंग का खात्मा: पहले की तरह एक ही काम के लिए अलग-अलग विभागों से बार-बार अनुमति लेने की बाध्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
  • जोखिम-आधारित निरीक्षण: अब सरकारी अधिकारी रैंडम चेकिंग के बजाय जोखिम के आधार पर निरीक्षण करेंगे, जिससे काम में पारदर्शिता आएगी और अधिकारियों की अनावश्यक दखलअंदाजी रुकेगी।

रोजगार सृजन का बड़ा लक्ष्य

राज्य सरकार का मानना है कि इन सुधारों के माध्यम से छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए एक अत्यधिक अनुकूल वातावरण का निर्माण होगा। औद्योगिक विकास को मिलने वाली इस नई गति से राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब उद्योग आसानी से लगेंगे और व्यापार विस्तार करेंगे, तो इसका सीधा असर राज्य में रोजगार के नए अवसरों के सृजन पर पड़ेगा। यह विधेयक आने वाले समय में राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने में एक बड़ी भूमिका निभा सकता है, जिससे स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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