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एक घंटा पहले
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इंडोनेशिया के जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच स्थित सुंडा स्ट्रैट में प्रकृति का एक बेहद डरावना और रौद्र रूप देखने को मिला है। यहां का सबसे सक्रिय और खतरनाक ज्वालामुखी, माउंट अनाक क्राकाताऊ, एक बार फिर पूरी ताकत के साथ दहक उठा है। इस भीषण विस्फोट को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे धरती का सीना चीरकर 'नर्क का द्वार' खुल गया हो। आसमान में कई किलोमीटर की ऊंचाई तक केवल जहरीली राख और घने काले धुएं का गुबार फैला हुआ है। इस प्राकृतिक संकट के कारण इंडोनेशिया की हवाई सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गई हैं और देश के चार प्रमुख हवाई अड्डों पर विमानों के परिचालन को पूरी तरह से रोक दिया गया है। हवा में तैरती इस खतरनाक राख की वजह से देश की सबसे घनी आबादी वाली राजधानी जकार्ता की तरफ एक विशाल संकट तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लाखों लोगों की सांसों पर आफत आ गई है।
हवाई सेवाएं पूरी तरह ठप: चार प्रमुख हवाई अड्डों पर पसरा सन्नाटा
अनाक क्राकाताऊ ज्वालामुखी से निकले धुएं और राख ने पूरे आसमान को अपनी चपेट में ले लिया है। दृश्यता शून्य के करीब पहुंच जाने और हवा में बारीक पत्थरों और कांच के कणों की मौजूदगी के कारण हवाई यात्रा बेहद जोखिम भरी हो गई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने बेहद कड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने देश के चार सबसे व्यस्त और बड़े हवाई अड्डों पर विमानों का संचालन सोमवार शाम 6 बजे तक के लिए पूरी तरह से रोक दिया है।
जिन हवाई अड्डों पर उड़ानों को रोका गया है, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- राजधानी जकार्ता का सबसे व्यस्त सुकर्णो-हट्टा हवाई अड्डा
- जकार्ता का ही दूसरा प्रमुख हलीम परदानाकुसुमा हवाई अड्डा
- लाम्पुंग प्रांत में स्थित राडिन इंटेन-II हवाई अड्डा
- बांडुंग शहर का प्रमुख हुसैन सास्त्रानेगारा हवाई अड्डा
इंडोनेशिया में हवाई अड्डों का प्रबंधन और कामकाज देखने वाली सरकारी कंपनी अंगकासा पुरा ने स्पष्ट किया है कि जब तक हवा में मौजूद जहरीली राख और धुएं का खतरा पूरी तरह से समाप्त नहीं हो जाता, तब तक किसी भी विमान को उड़ान भरने या उतरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता है।
यात्रियों की बेबसी: हवाई अड्डों पर फंसे पौने दो लाख लोग
ज्वालामुखी विस्फोट के बाद अचानक उड़ानों पर लगी रोक के कारण हवाई अड्डों पर भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण अब तक 1,500 से भी अधिक उड़ानें पूरी तरह रद्द या गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी हैं। चूंकि यह घटना सप्ताहांत के ठीक बाद हुई, इसलिए बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और गंतव्यों की यात्रा पर निकले हुए थे। आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में लगभग 1,70,000 (एक लाख सत्तर हजार) यात्री देश के विभिन्न हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं।
विभिन्न हवाई अड्डों के टर्मिनलों के भीतर यात्रियों की लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग घंटों से अपनी उड़ानों के दोबारा शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन मौसम और आसमान के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। हवाई अड्डा प्रशासन यात्रियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करने में जुटा है, लेकिन अचानक उमड़ी इस भारी भीड़ के सामने संसाधन भी कम पड़ रहे हैं।
राजधानी जकार्ता पर मंडराया संकट: सांसों पर भारी पड़ रहा जहरीला गुबार
इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने देश के लिए एक बेहद गंभीर और डरावनी चेतावनी जारी की है। अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों और डेटा से यह साफ पता चल रहा है कि अनाक क्राकाताऊ ज्वालामुखी से निकले राख के दो विशालकाय गुबार सीधे देश की राजधानी जकार्ता की ओर बढ़ रहे हैं। सोमवार सुबह 6 बजे की रिपोर्ट के अनुसार, इस राख के बादलों को जकार्ता के आसमान में प्रवेश करते हुए स्पष्ट रूप से देखा गया है।
जकार्ता इंडोनेशिया का सबसे सघन आबादी वाला महानगरीय क्षेत्र है, जहां करोड़ों लोग निवास करते हैं। यदि यह जहरीली राख शहर के निचले वायुमंडल में प्रवेश करती है, तो लोगों के लिए सांस लेना भी दूभर हो जाएगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ज्वालामुखी की राख साधारण धूल नहीं होती। इसमें बारीक सिलिका, सल्फर और अन्य रासायनिक तत्व होते हैं जो इंसानी फेफड़ों को हमेशा के लिए क्षतिग्रस्त कर सकते हैं। इसके अलावा, यह उड़ते हुए विमानों के जेट इंजनों के भीतर जाकर उन्हें पूरी तरह से जाम कर सकती है, जिससे आसमान में ही विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा रहता है।
अनाक क्राकाताऊ का खौफनाक और विनाशकारी इतिहास
जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच सुंडा स्ट्रैट (सुंडा जलडमरूमध्य) में स्थित माउंट अनाक क्राकाताऊ कोई साधारण पहाड़ी नहीं है। इसे दुनिया के सबसे अशांत, सक्रिय और हिंसक ज्वालामुखियों में गिना जाता है। 'अनाक क्राकाताऊ' का शाब्दिक अर्थ 'क्राकाताऊ का बच्चा' होता है, जो ऐतिहासिक क्राकाताऊ ज्वालामुखी के विनाश के बाद उसी स्थान पर उत्पन्न हुआ है। हाल के वर्षों में इसमें लगातार कई भीषण विस्फोट हुए हैं।
साल 2018 में भी इस ज्वालामुखी में एक ऐसा ही भयानक विस्फोट हुआ था। उस समय धमाका इतना तेज था कि ज्वालामुखी का एक बहुत बड़ा हिस्सा ढहकर सीधे समुद्र में गिर गया था। इसके कारण समुद्र के भीतर एक विशाल भूस्खलन हुआ, जिसने भयानक सुनामी का रूप ले लिया था। उस दर्दनाक हादसे में बिना किसी पूर्व चेतावनी के तटीय इलाकों में पानी का तांडव मच गया था, जिसमें 400 से अधिक मासूम लोगों की जान चली गई थी और हजारों लोग बेघर हो गए थे। आज एक बार फिर उसी खौफनाक मंजर की यादें स्थानीय लोगों के दिलों में ताजा हो गई हैं।
माउंट सेमेरू और माउंट डुकोनो का हालिया तांडव
इंडोनेशिया के लोगों के लिए ज्वालामुखियों के साथ जीना कोई नई बात नहीं है। इस देश की धरती के नीचे लगातार हलचल होती रहती है। अभी पिछले ही महीने इंडोनेशिया के पूर्वी जावा प्रांत में स्थित एक और बेहद खतरनाक ज्वालामुखी, माउंट सेमेरू, अचानक फट गया था। उस समय ज्वालामुखी के शिखर से लगभग 2,000 मीटर की ऊंचाई तक राख का एक विशाल गुबार आसमान में छा गया था। इसके साथ ही, पहाड़ों से नीचे की ओर बहने वाली गर्म राख, सुलगते पत्थरों और मलबे का बहाव पास की एक नदी के किनारे लगभग 2 किलोमीटर दूर तक देखा गया था। उस समय भी प्रशासन को त्वरित कार्रवाई करते हुए क्रेटर के 5 किलोमीटर के दायरे में सभी मानवीय और आर्थिक गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना पड़ा था।
इसी प्रकार, चालू वर्ष के मई महीने में भी इंडोनेशिया के उत्तरी मालुकु प्रांत में स्थित माउंट डुकोनो ज्वालामुखी ने भारी तबाही मचाई थी। 8 मई की सुबह करीब 7:40 बजे इस ज्वालामुखी में अचानक एक अत्यंत शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिससे लगभग 10 किलोमीटर की ऊंचाई तक घने काले रंग की राख का गुबार आसमान में फैल गया था। इस भीषण प्राकृतिक हादसे में 3 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इसके कुछ ही दिनों बाद, 17 मई को इस पहाड़ में दोबारा विस्फोट हुआ और इसकी चोटी से 5,000 मीटर ऊपर तक राख की लपटें उठीं। उस समय सुरक्षा बलों और राहत टीमों ने क्रेटर के चारों ओर 4 किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह से खाली करा लिया था, क्योंकि भारी मानसूनी बारिश के दौरान ज्वालामुखी के ठंडे और गर्म कीचड़ (लाहार) के नीचे बहने का बहुत बड़ा खतरा बना हुआ था।
प्रशांत महासागर का 'रिंग ऑफ फायर': क्यों दहकती है इंडोनेशिया की धरती?
यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इंडोनेशिया में ही बार-बार इतने भयानक ज्वालामुखी विस्फोट और भूकंप क्यों आते हैं? इसका वैज्ञानिक कारण इस देश की भौगोलिक स्थिति में छिपा है। इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के उस अत्यंत संवेदनशील हिस्से में स्थित है जिसे वैश्विक स्तर पर 'रिंग ऑफ फायर' कहा जाता है। यह घोड़ा-नाल (हॉर्सशू) के आकार का एक ऐसा क्षेत्र है जहां दुनिया की सबसे सक्रिय टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती और एक-दूसरे के नीचे खिसकती रहती हैं।
इस निरंतर घर्षण और भूगर्भीय हलचल के कारण इस क्षेत्र में लगातार भूकंप आते हैं और धरती के भीतर का पिघला हुआ मैग्मा बाहर आने का रास्ता ढूंढता रहता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि अकेले इंडोनेशिया में ही 120 से अधिक सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद हैं। यही कारण है कि यह पूरा देश दुनिया के सबसे संवेदनशील भूकंपीय और ज्वालामुखी प्रभावित क्षेत्रों में शीर्ष पर आता है, और यहां के निवासी हमेशा एक अनजाने भय के साये में जीने को मजबूर रहते हैं।
पूरे देश में हाई अलर्ट: लोगों को घरों में रहने की सलाह
वर्तमान में अनाक क्राकाताऊ के इस नए विस्फोट ने पूरे इंडोनेशियाई प्रशासन की नींद उड़ा दी है। देश की सभी आपदा प्रबंधन और राहत एजेंसियां इस समय युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं और उन्हें हाई अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों के लिए सख्त हिदायत जारी की है कि वे किसी भी परिस्थिति में ज्वालामुखी क्रेटर के नजदीक जाने का प्रयास न करें।
इसके साथ ही, जकार्ता और उसके आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को घरों के भीतर रहने और बेहद जरूरी होने पर ही बाहर निकलने की सलाह दी गई है। बाहर निकलते समय सभी को उच्च गुणवत्ता वाले मास्क पहनने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जहरीली धूल फेफड़ों में न जा सके। यदि आने वाले कुछ दिनों तक हवा की दिशा ऐसी ही बनी रही, तो यह प्राकृतिक आपदा इंडोनेशिया के लिए एक बहुत बड़े मानवीय और आर्थिक संकट का रूप ले सकती है। फिलहाल पूरा देश और दुनिया यही प्रार्थना कर रही है कि प्रकृति का यह क्रोध जल्द से जल्द शांत हो जाए।
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