9/11 आतंकी हमले के सबूत दबाने का आरोप: FBI पर उठे गंभीर सवाल, सऊदी अरब कनेक्शन का हुआ खुलासा विश्व 2 घंटे पहले 4
अमेरिका में 9/11 आतंकी हमले के 25 साल बाद सामने आए नए फुटेज और दस्तावेजों ने FBI की जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एजेंसी ने अल-कायदा और सऊदी अरब के बीच के संबंधों से जुड़े पुख्ता सबूतों को वर्षों तक दबाकर रखा।

9/11 हमले के 25 साल बाद गहराए सवाल

अमेरिका में 11 सितंबर 2001 के दिन जो भयावह मंजर देखा गया, उसे आज भी पूरी दुनिया की यादों में एक नासूर की तरह है। अल-कायदा के आतंकवादियों द्वारा अंजाम दिए गए उस हमले ने न केवल अमेरिका को हिला दिया था, बल्कि वैश्विक सुरक्षा की नींव को भी झकझोर कर रख दिया था। इस हमले में 2977 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इतने बड़े नरसंहार के करीब 25 साल बाद अब जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि एजेंसी ने इस आतंकी कृत्य से जुड़े कुछ अहम सबूतों को जानबूझकर छिपाया या उन पर ध्यान नहीं दिया।

उमर अल-बयूमी और विवादित वीडियो

हाल ही में बीबीसी की एक रिपोर्ट के जरिए कुछ पुराने फुटेज सार्वजनिक हुए हैं, जिन्होंने उमर अल-बयूमी नामक शख्स को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अल-बयूमी 9/11 के पीड़ित परिवारों द्वारा दायर की गई एक लाख करोड़ डॉलर की मुकदमेबाजी में एक केंद्रीय पात्र के रूप में देखा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि हमले के कुछ ही दिनों के भीतर यह फुटेज एफबीआई के हाथों में पहुंच गया था, लेकिन उस समय इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सामने आए एक वीडियो क्लिप में 1997 या 1998 के दौरान सैन डिएगो में पेंटबॉल खेलते हुए उमर अल-बयूमी और अनवर अल-अवलाकी एक साथ नजर आते हैं। गौरतलब है कि अनवर अल-अवलाकी आगे चलकर अल-कायदा की अरब प्रायद्वीप शाखा का प्रमुख बना था। वीडियो में देखा जा सकता है कि खिलाड़ी सैन्य पोशाक पहने हुए हैं और निशानेबाजी का अभ्यास कर रहे हैं। इस दौरान वहां 'अल्ला-हु-अकबर' के नारे भी सुनाई देते हैं। इस पूरे अभ्यास के दौरान एक सऊदी शेख भी वहां मौजूद थे। जांच में बाद में यह सामने आया कि उस दौर में कई लोग इन गतिविधियों को जिहाद की ट्रेनिंग का हिस्सा मानते थे।

FBI पर सबूतों को दबाने के आरोप

पीड़ित परिवारों के पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहीं वकील जोडी वेस्टब्रुक फ्लॉवर्स का मानना है कि बयूमी के पास से मिले दस्तावेज इस पूरे मामले की 'स्मोकिंग गन' थे। 21 सितंबर 2001 को जब ब्रिटेन में बयूमी को गिरफ्तार किया गया था, तो उसके पास से हजारों दस्तावेज, तस्वीरें और 80 से अधिक वीडियो टेप बरामद हुए थे। इनमें एक नोटबुक का पन्ना भी शामिल था, जिस पर विमान का रेखाचित्र और उड़ान से संबंधित हिसाब-किताब दर्ज था।

आरोप है कि बयूमी 1994 में सऊदी अरब से अंग्रेजी पढ़ने के नाम पर सैन डिएगो आया था, लेकिन उसने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। वह अक्सर सऊदी इस्लामिक मामलों के मंत्रालय से जुड़े प्रचारकों और अधिकारियों से संपर्क में रहता था। हमले के बाद जब दो हाईजैकर्स नवाफ अल-हजमी और खालिद अल-मिहधार के अपार्टमेंट के किराये के कागजात मिले, तो उसमें बयूमी का नाम सामने आया। बावजूद इसके, उसे 28 सितंबर को रिहा कर दिया गया।

जांच में कहां हुई चूक?

अमेरिकी अधिकारियों ने उस समय दलील दी थी कि बयूमी को रोकने के लिए उनके पास प्रत्यर्पण संबंधी पर्याप्त सबूत नहीं थे। सैन डिएगो की एफबीआई टीम को समय रहते वे महत्वपूर्ण सामग्रियां नहीं मिल पाईं, जो जांच की दिशा बदल सकती थीं। उस समय की घटना के जांच प्रमुख रिक लैम्बर्ट ने स्वीकार किया है कि यदि वे दस्तावेज समय रहते मिल जाते, तो यह पहेली काफी पहले सुलझ गई होती।

पीड़ित परिवारों का निरंतर यह आरोप रहा है कि इस हमले की साजिश में सऊदी अरब की संलिप्तता थी और बयूमी ने उन दो हाईजैकर्स की प्रत्यक्ष रूप से सहायता की थी। 11 सितंबर 2001 को कुल 19 आतंकवादियों ने 4 विमानों का अपहरण किया था, जिनमें से दो विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराए, एक पेंटागन में जा घुसा और चौथा विमान पेन्सिलवेनिया के एक खाली मैदान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। अब ये पुराने वीडियो एक बार फिर पुरानी जांच में हुई चूक और खामियों को दुनिया के सामने लेकर आए हैं, जिससे पीड़ित परिवारों का गुस्सा फिर से बढ़ गया है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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