मध्य प्रदेश
एक दिन पहले
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बुंदेलखंड की अद्भुत परंपरा
मध्य प्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र अपनी सांस्कृतिक विरासतों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यहां की सोने की नसेनी की परंपरा सबसे अलग मानी जाती है। छतरपुर जिले में आज भी यह मान्यता पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। जब कोई व्यक्ति अपने परिवार की चार पीढ़ियां देख लेता है, यानी अपने बेटे, पोते और परपोते का मुख देख लेता है, तब उसके सम्मान में सोने की नसेनी तैयार करवाई जाती है।
क्या है इसके पीछे की मान्यता
स्थानीय निवासी कामता प्रसाद शुक्ला के अनुसार, जब कोई पुरुष या महिला अपने वंश की तीन पीढ़ियों को जीते जी देख लेते हैं, तो उन्हें बैकुंठ धाम की प्राप्ति का अधिकारी माना जाता है। इस परंपरा में केवल बेटे के वंश को ही गिना जाता है। ऐसी गहरी आस्था है कि जीवनकाल में बनवाई गई इस नसेनी को दान कर देने से, मृत्यु के बाद वह व्यक्ति के लिए स्वर्ग जाने की सीढ़ी का काम करती है। आज के दौर में जब सोने के दाम इतने अधिक हैं, तब भी लोग इस पुरानी परंपरा के प्रति अपना विश्वास बनाए हुए हैं।
नसेनी का दान और महत्व
यह नसेनी हर व्यक्ति अपने बजट के अनुसार बनवाता है। कुछ लोग छोटी नसेनी बनवाते हैं तो कुछ सामर्थ्य के अनुसार इसका आकार बड़ा रखते हैं। मरने के बाद इस नसेनी का दान करना अनिवार्य माना गया है। कामता प्रसाद का कहना है कि यह परंपरा हमारे बुजुर्गों द्वारा चली आ रही है और इसका पालन करना एक शुभ कार्य माना जाता है।
तीन पीढ़ियां देखने का गणित
कामता प्रसाद अपनी जीवन यात्रा साझा करते हुए कहते हैं कि 70 साल की आयु तक उन्होंने अपने बेटे, पोते और अब परपोते यानी सनाति को देखने का लक्ष्य रखा है। उनका मानना है कि इस सौभाग्य को पाने के लिए कम उम्र में शादी करना महत्वपूर्ण है। वे कहते हैं कि आज की पीढ़ी करियर के चक्कर में 30 साल की उम्र के बाद विवाह करती है, जबकि पुरानी परंपराओं के अनुसार जल्दी विवाह करने से ही अपनी पीढ़ियों को फलते-फूलते देखने का अवसर मिलता है।
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