पंजाब
एक घंटा पहले
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पंजाब में कांग्रेस का चुनावी अभियान हुआ प्रभावित
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी कांग्रेस पार्टी के सामने अब एक बड़ी बाधा खड़ी हो गई है। राहुल गांधी की सितंबर महीने में होने वाली बहुप्रतीक्षित बस यात्रा पर अब अनिश्चितता के बादल छा गए हैं और यह कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। कांग्रेस इसे राज्य में अपने चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत के रूप में देख रही थी, लेकिन पार्टी के भीतर मची खींचतान और हाल ही में उपजे विवादों ने इस पूरी योजना को पटरी से उतार दिया है।
सज्जन कुमार विवाद और जुबानी जंग
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सबसे बड़ा कारण सज्जन कुमार के निधन के बाद सामने आया श्रद्धांजलि विवाद माना जा रहा है। सज्जन कुमार को लेकर हरियाणा के कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा की ओर से दी गई टिप्पणियों ने पंजाब में एक बड़ा राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया। दीपेंद्र हुड्डा के बयान, जिसमें कथित तौर पर सज्जन कुमार को एक आदर्श व्यक्ति के रूप में पेश किया गया, पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी। इस बयानबाजी के चलते पार्टी की छवि को भारी नुकसान पहुँचा और चन्नी को बाद में अपने रुख पर खेद प्रकट करना पड़ा। उन्हें कई बार सफाई देनी पड़ी, जिसने कांग्रेस को राज्य की राजनीति में बैकफुट पर धकेल दिया है।
राहुल गांधी की यात्रा की रूपरेखा
कांग्रेस की योजना के अनुसार, राहुल गांधी को सितंबर के पहले सप्ताह में पंजाब पहुंचना था। उनकी यह यात्रा अमृतसर के दरबार साहिब में मत्था टेकने के साथ शुरू होने वाली थी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य पूरे पंजाब में कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं को एक बस में बैठाकर जनता के बीच एकता का संदेश देना था। योजना के मुताबिक, राहुल गांधी की यह बस यात्रा अमृतसर से शुरू होकर हुसैनीवाला तक लगभग 135 किलोमीटर लंबी होनी थी। पहले चरण के दौरान इस यात्रा का लक्ष्य राज्य के करीब 25 से 30 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करना था। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर राजा वडिंग ने इस यात्रा को लेकर दावा किया था कि राहुल गांधी पंजाब में 2 दिन से लेकर 15 दिन तक रुक सकते हैं। हालांकि, ताजा घटनाक्रम के बाद अब सभी कार्यक्रम ठंडे बस्ते में चले गए हैं।
कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी का गहरा संकट
पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन चुनावी वर्ष में यह और अधिक स्पष्ट हो गई है। वर्तमान में चन्नी और रंधावा गुट के नेता प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर राजा वडिंग को पद से हटाने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। हालांकि पार्टी का आलाकमान अभी किसी भी तरह के बड़े संगठनात्मक बदलाव से इनकार कर रहा है। इस अनसुलझे विवाद के बीच राहुल गांधी की यात्रा को एक ऐसे माध्यम के रूप में देखा जा रहा था जो सभी गुटों को एक मंच पर ला सके। लेकिन पार्टी की यह रणनीति फिलहाल विफल होती दिख रही है।
मुख्यमंत्री पद की होड़ और चुनावी संभावनाएं
कांग्रेस के लिए चिंता का एक और बड़ा विषय मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनने की महत्वाकांक्षा है। चुनावी रणनीतिकार सुनील कोनुगोलू की आंतरिक रिपोर्ट में संकेत दिए गए थे कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के खिलाफ पार्टी की जीत की प्रबल संभावना थी। लेकिन मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल करीब पांच प्रमुख नेताओं के बीच मची प्रतिस्पर्धा ने पार्टी की चुनावी संभावनाओं को कमजोर कर दिया है। नेता लगातार एक-दूसरे पर सार्वजनिक बयानबाजी कर रहे हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। विपक्ष, विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), इस मुद्दे पर कांग्रेस को लगातार निशाने पर ले रही है। बीजेपी का स्पष्ट कहना है कि कांग्रेस अपनी आंतरिक लड़ाई के कारण ही राहुल गांधी के रथ को आगे नहीं बढ़ा पा रही है। अब पार्टी की पूरी उम्मीद राहुल गांधी के दौरे पर टिकी है कि यदि वह जल्द पंजाब आते हैं, तो शायद कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंका जा सके और आपसी कलह को कुछ हद तक शांत किया जा सके।
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