अहमदाबाद: आसाराम के आश्रम के पास बुलडोज़र की कार्रवाई, मौके पर भारी पुलिस बल तैनात गुजरात 2 घंटे पहले 3
अहमदाबाद के मोटेरा इलाके में आसाराम के आश्रम के पास प्रशासन ने बुलडोज़र चलाकर 45 सौ वर्ग मीटर से ज़्यादा ज़मीन खाली कराने का अभियान शुरू किया है, जिसकी कीमत 500 करोड़ रुपये से ज़्यादा बताई जा रही है। हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अहमदाबाद विकास प्राधिकरण ने यह कदम उठाया है।

अहमदाबाद में आसाराम के आश्रम के नज़दीक बुलडोज़र की कार्रवाई जारी है। प्रशासन यहां 45 सौ वर्ग मीटर से ज़्यादा ज़मीन को खाली करा रहा है, जिसकी कीमत 500 करोड़ रुपये से ज़्यादा आंकी गई है। आसाराम के मोटेरा आश्रम ट्रस्ट की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी और उसके खारिज होने के बाद अहमदाबाद विकास प्राधिकरण ने यह कार्रवाई शुरू की। मौके पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात की गई है।

कार्रवाई के दौरान आश्रम में रहने वाले लोगों ने इसका विरोध किया। लोगों को आश्रम छोड़कर जाना पड़ा, जिससे नाराज़गी और बढ़ गई। फिलहाल पुलिस स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रही है। बताया जा रहा है कि इन स्थानों पर लोगों ने अवैध तरीके से मकान बना रखे थे और प्रशासन की टीम पूरे इलाके से अतिक्रमण हटा रही है। तोड़फोड़ की वजह से लोगों को अपनी जगहें छोड़कर जाना पड़ रहा है।

हाई कोर्ट ने दिया था आदेश

गुजरात हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच ने 16 अप्रैल 2026 को आसाराम आश्रम की अपील खारिज कर दी थी। इस फैसले के साथ ही अहमदाबाद के मोटेरा इलाके में 45,000 वर्ग मीटर से ज़्यादा ज़मीन वापस लेने का राज्य सरकार का रास्ता साफ़ हो गया। आश्रम ने अहमदाबाद ज़िला कलेक्टर के ज़मीन वापस लेने के आदेश के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाया था।

यह ज़मीन अहमदाबाद में नरेंद्र मोदी स्टेडियम और सरदार पटेल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के ठीक बगल में स्थित है। माना जा रहा है कि यह ज़मीन 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक के आयोजन के लिए काम आ सकती है।

क्या है पूरा मामला

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में लगभग 33,980 वर्ग मीटर ज़मीन आवंटित की गई थी। विवाद के केंद्र में रही यह ज़मीन दशकों पहले कड़ी शर्तों के साथ सीमित धार्मिक उपयोग के लिए दी गई थी। हालांकि समय बीतने के साथ राज्य के अधिकारियों के सामने यह बात आई कि आश्रम ने अपनी आवंटित सीमा से ज़्यादा ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है।

रिकॉर्ड बताते हैं कि भले ही करीब 33,980 वर्ग मीटर ज़मीन आवंटित हुई थी, लेकिन वास्तविक कब्ज़ा लगभग 50,000 वर्ग मीटर तक फैल चुका था, जो बड़े पैमाने पर अतिक्रमण की ओर इशारा करता है। इस मामले में दशकों पुराने ज़मीन के रिकॉर्ड, सर्वे शीट और नक्शों के आधार पर दलीलें रखी गईं।

राज्य की ओर से पेश सरकारी वकील जी. एच. विर्क ने ज़ोर देते हुए कहा, "राज्य की कार्रवाई निष्पक्षता, पारदर्शिता और कानून का सख्ती से पालन करने पर आधारित है।"

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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