'बंदर' देखने से पहले निपटा लें अनुराग कश्यप की ये 7 फिल्में, दिमाग हिला देंगी ये डार्क कॉमेडी, हर एक की रेटिंग शानदार मनोरंजन एक घंटा पहले 3
अनुराग कश्यप की नई फिल्म 'बंदर' 5 जून को सिनेमाघरों में आ चुकी है, जिसमें बॉबी देओल समेत कई दिग्गज कलाकार हैं। इसे देखने से पहले डायरेक्टर की इन 7 बेहतरीन फिल्मों पर एक नजर डाल लीजिए।

लीक से हटकर सिनेमा गढ़ने के लिए पहचाने जाने वाले अनुराग कश्यप एक बार फिर एक अनूठी कहानी के साथ हाजिर हैं। उनकी फिल्म 'बंदर' 5 जून को रिलीज हो चुकी है, जिसका दर्शकों को लंबे समय से इंतजार था। इस फिल्म में बॉबी देओल के साथ सान्या मल्होत्रा, सबा आजाद, रिद्धि सेन, राज बी. शेट्टी और जितेंद्र जोशी अहम भूमिकाओं में दिखे हैं। 'बंदर' की कहानी अपराध, समाज की अलग-अलग परतों और मनोवैज्ञानिक उलझनों के इर्द-गिर्द बुनी गई है।

कश्यप की फिल्मों में अपराध, राजनीति, समाज और मानवीय मनोविज्ञान की पेचीदा परतें देखने को मिलती हैं। बॉलीवुड के पारंपरिक फॉर्मूले से हटकर बनी उनकी फिल्मों ने आलोचकों की तारीफ तो बटोरी ही, साथ ही दर्शकों के बीच भी एक खास जगह बनाई। 'बंदर' देखने से पहले उनकी इन फिल्मों को देखना न भूलें।

ब्लैक फ्राइडे (2004)

1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म अनुराग कश्यप की सबसे अहम कृतियों में गिनी जाती है। पत्रकार एस. हुसैन जैदी की किताब पर आधारित यह फिल्म आतंकी हमलों की जांच, अपराधियों की तलाश और पूरे घटनाक्रम को बेहद यथार्थवादी ढंग से सामने रखती है। इसकी डॉक्यूमेंट्री जैसी प्रस्तुति, दमदार अभिनय और गहन रिसर्च को समीक्षकों ने खूब सराहा।

देव.डी (2009)

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के कालजयी उपन्यास 'देवदास' को कश्यप ने पूरी तरह नए और आधुनिक अंदाज में 'देव.डी' के रूप में गढ़ा। यह फिल्म पारंपरिक प्रेम कथा से हटकर आज के दौर के रिश्तों, बिखराव और आत्म-विनाश को दिखाती है। अभय देओल, माही गिल और कल्कि कोचलिन अभिनीत इस फिल्म में प्यार, दिल टूटने, नशे और आत्म-स्वीकृति को बिल्कुल अलग नजरिए से पेश किया गया है।

गुलाल (2009)

राजस्थान की सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि पर रची गई 'गुलाल' सत्ता, जातीय पहचान, छात्र राजनीति और महत्वाकांक्षा जैसे विषयों को गहराई से छूती है। रिलीज के वक्त भले ही इसे सीमित कामयाबी मिली हो, पर समय के साथ यह एक कल्ट क्लासिक बन गई। इसके गाने और संवाद आज भी प्रशंसकों के बीच खूब पसंद किए जाते हैं।

गैंग्स ऑफ वासेपुर (2012)

कश्यप की सबसे चर्चित फिल्मों में शुमार 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' दो भागों में बनी एक विशाल क्राइम गाथा है। धनबाद के कोयला कारोबार और कई पीढ़ियों तक खिंची दुश्मनी की कहानी को इसमें बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया है। इसके यादगार किरदार, धारदार संवाद और लाजवाब संगीत ने इसे भारतीय सिनेमा की कल्ट फिल्मों की कतार में खड़ा कर दिया।

अग्ली (2013)

एक बच्चे के अचानक लापता हो जाने से शुरू होने वाली 'अग्ली' महज एक थ्रिलर नहीं, बल्कि इंसानी स्वार्थ, टूटते रिश्तों और लालच की गहरी पड़ताल भी है। फिल्म का यथार्थवादी अंदाज और भावनात्मक गहराई दर्शकों को भीतर तक झकझोर देती है।

रमन राघव 2.0 (2016)

मुंबई के कुख्यात सीरियल किलर रमन राघव से प्रेरित इस मनोवैज्ञानिक थ्रिलर में नवाजुद्दीन सिद्दीकी और विक्की कौशल का अभिनय यादगार है। यह फिल्म अपराधी मानसिकता और अच्छाई-बुराई के धुंधले होते फर्क को बेहद नए ढंग से सामने रखती है।

मुक्काबाज (2017)

यह फिल्म एक छोटे शहर के युवा मुक्केबाज की कहानी है, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए सामाजिक भेदभाव, राजनीति और भ्रष्ट व्यवस्था से जूझता है। खेल की कहानी के साथ-साथ यह फिल्म समाज की कई कड़वी सच्चाइयों को भी उजागर करती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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