चीन-पाकिस्तान की भारत को घेरने की चाल नाकाम, UN में अमेरिका ने पलटा पासा, मुनीर की रणनीति को झटका विश्व 3 महीने पहले 49
संयुक्त राष्ट्र में BLA और मजीद ब्रिगेड को 1267 आतंकवाद प्रतिबंध सूची में डलवाने की चीन-पाकिस्तान की कोशिश को अमेरिका ने रोक दिया। अमेरिका ने तर्क दिया कि इन संगठनों का अल-कायदा या ISIS से कोई ठोस संबंध साबित नहीं होता।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान और चीन को बड़ी कूटनीतिक मात मिली है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी मजीद ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध सूची में शामिल कराने की दोनों देशों की कोशिश को अमेरिका ने रोक दिया है। अमेरिका का स्पष्ट कहना है कि इन संगठनों के अल-कायदा या ISIS से जुड़े होने का कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है।

खास बात यह है कि इस समय पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्ते बेहद करीबी माने जा रहे हैं, फिर भी वॉशिंगटन ने इस्लामाबाद का साथ देने से इनकार कर दिया। इस फैसले को पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की रणनीति के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है। मुनीर लगातार बलूच संगठनों को भारत से जोड़ने की कोशिश करते रहे हैं, ताकि यह सवाल ही खत्म हो जाए कि यह दरअसल पाकिस्तान के आंतरिक मामले से जुड़ी समस्या है।

चीन और पाकिस्तान की योजना क्या थी?

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 आतंकवाद प्रतिबंध व्यवस्था के तहत BLA और मजीद ब्रिगेड को प्रतिबंधित सूची में डालने का प्रस्ताव पेश किया था। यह वही व्यवस्था है, जिसका इस्तेमाल अल-कायदा और ISIS से जुड़े संगठनों तथा व्यक्तियों पर वैश्विक स्तर पर प्रतिबंध लगाने के लिए किया जाता है।

हालांकि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर ‘टेक्निकल होल्ड’ लगा दिया। उसका तर्क रहा कि BLA और मजीद ब्रिगेड का अल-कायदा या ISIS से सीधा संबंध साबित नहीं होता, इसलिए इन्हें 1267 सूची में शामिल नहीं किया जा सकता।

भारत को कैसे हुआ फायदा?

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने इस मामले में सक्रिय कूटनीतिक प्रयास किए। फ्रांस ने भी भारत के रुख का समर्थन किया—ठीक उसी तरह, जैसे चीन की मदद से पाकिस्तान भारत के प्रस्तावों को रोकता रहा है। बाद में अमेरिका ने अपना रुख और सख्त करते हुए प्रस्ताव को आगे बढ़ने ही नहीं दिया।

इस पूरे घटनाक्रम को भारत की कूटनीतिक कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पाकिस्तान की वह कोशिश कमजोर पड़ गई, जिसके जरिए वह बलूच विद्रोही संगठनों को भारत समर्थित आतंकवादी नेटवर्क के रूप में पेश करना चाहता था।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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