आम की खेती करने वाले किसानों की मौज, फल का बगीचा लगाने पर सरकार देगी 95 हजार रुपये का अनुदान छत्तीसगढ़ 2 घंटे पहले 2
छत्तीसगढ़ में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग की ओर से एक खास योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत किसान फलदार पौधे लगाकर 95 हजार रुपये तक की सरकारी आर्थिक मदद पा सकते हैं।

बागवानी को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल

खेती-किसानी के क्षेत्र में अपनी आय बढ़ाने की कोशिश कर रहे किसानों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में उद्यान विभाग की ओर से एक विशेष योजना संचालित की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य में फलदार फसलों और बगीचों के विस्तार को प्रोत्साहित करना है। इस योजना के जरिए किसान न केवल अपनी जमीन पर आम का बगीचा विकसित कर सकते हैं, बल्कि सरकारी अनुदान प्राप्त करके अपनी लागत का बड़ा हिस्सा भी वापस पा सकते हैं।

मिलेंगे 95 हजार रुपये तक के लाभ

उद्यान विभाग की राज्य स्तरीय समेकित उद्यान विकास योजना के अंतर्गत यह अनुदान दिया जा रहा है। यदि कोई किसान अपने खेतों में फलदार पौधों का रोपण करना चाहता है, तो उसे सरकार की ओर से 95 हजार रुपये तक का अनुदान मिल सकता है। हालांकि, इस आर्थिक सहायता का लाभ उठाने के लिए एक शर्त रखी गई है कि किसान को कम से कम ढाई एकड़ भूमि पर अपना फलोद्यान विकसित करना होगा। किसान अपनी इच्छा और उपलब्ध जमीन के अनुसार ढाई एकड़ से ज्यादा रकबे में भी ये पौधे लगा सकते हैं।

आम की उन्नत किस्में और विभाग की भूमिका

विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि आम के पौधों की उपलब्धता के लिए किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। बिलासपुर जिले के चारों विकासखंडों में स्थित विभागीय नर्सरियों में आम की बेहतरीन और ग्राफ्टेड किस्में उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इनमें प्रमुख तौर पर दशहरी, लंगड़ा, चौसा और आम्रपाली जैसी लोकप्रिय किस्में शामिल हैं। इन पौधों की दर विभाग की तरफ से 100 रुपये प्रति पौधा तय की गई है। इच्छुक किसान अपने नजदीकी विकासखंड कार्यालय या नर्सरी से संपर्क कर पौधे खरीद सकते हैं।

पौधों के अलावा अन्य गतिविधियों पर भी सहायता

यह योजना केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि फलोद्यान को व्यवस्थित करने से जुड़ी अन्य जरूरतों पर भी विभाग की तरफ से मदद की जाती है। बागवानी को और अधिक लाभकारी बनाने के लिए योजना में निम्नलिखित घटकों को शामिल किया गया है:

  • बागवानी के दौरान इंटरक्रॉपिंग या अन्य फसलें लेने के लिए अतिरिक्त सहायता।
  • बगीचे की सुरक्षा के लिए फेंसिंग (घेराबंदी) की व्यवस्था।
  • सिंचाई के लिए जरूरी बोर की सुविधा पर भी अनुदान का प्रावधान।

किसान इन सभी सुविधाओं को विभाग द्वारा तय की गई प्रक्रिया के तहत खुद भी पूरा कर सकते हैं, जिसके लिए उन्हें संबंधित दस्तावेज जमा करने होंगे।

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रिया

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया को बेहद सरल रखा गया है। किसानों को अपने संबंधित विकासखंड की उद्यान नर्सरी में जाना होगा और वहां तैनात ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी के माध्यम से अपना आवेदन प्रस्तुत करना होगा। आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेजों का संलग्न होना जरूरी है:

  • भूमि के मालिकाना हक का प्रमाण (बी-1 और खसरा की प्रति)।
  • किसान का आधार कार्ड
  • अनुदान की राशि प्राप्त करने के लिए बैंक खाते का विवरण (पासबुक की फोटोकॉपी)।

विभागीय नियमों के मुताबिक, आवेदन जमा होने के बाद अधिकारी इसकी विधिवत जांच करेंगे। पात्रता पूरी पाए जाने पर ही किसान को योजना का लाभ दिया जाएगा।

लक्ष्य के आधार पर प्राथमिकता

बिलासपुर उद्यान विभाग के उपसंचालक कमलेश दीवान ने बताया कि जिले को जो लक्ष्य मिला है, उसी के आधार पर अनुदान का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। प्राथमिकता उन किसानों को दी जाएगी जो पात्रता की शर्तों को पूरा करते हैं। कमलेश दीवान ने सभी किसानों से आह्वान किया है कि वे इस योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाएं और केवल आम ही नहीं, बल्कि अन्य फलदार फसलों की खेती को भी अपनाएं ताकि कृषि क्षेत्र में विविधता आ सके। अधिक जानकारी के लिए किसान अपने संबंधित विकासखंड कार्यालय से तुरंत संपर्क कर सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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