बिहार
2 घंटे पहले
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फर्जी आईएएस अधिकारी का खेल उजागर
बिहार के खगड़िया जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को धर दबोचा है, जो खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS अधिकारी बताकर लोगों को ठगता था। पकड़े गए आरोपी की पहचान गोगरी-जमालपुर के रहने वाले मनीष गुप्ता के रूप में हुई है। हैरानी की बात यह है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का 'अंडर कवर एजेंट' होने का दावा किया है। पुलिस अब इस सनसनीखेज दावे की सच्चाई पता लगाने में जुटी है।
घर से मिली विलासिता की चीजें
खगड़िया के एसपी भानु प्रताप सिंह के अनुसार, पुलिस ने जब मनीष गुप्ता के गोगरी-जमालपुर स्थित आवास पर छापेमारी की, तो वहां से बरामदगी देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। आरोपी के ठिकाने से जो सामान मिला है, उसमें शामिल हैं:
- 31 लीटर महंगी विदेशी शराब।
- प्रतिबंधित बारहसिंगा के दो सींग।
- एक महंगी टेस्ला कार।
- 23 क्रेडिट कार्ड और 8 डेबिट कार्ड।
- एप्पल कंपनी के पांच आईफोन।
पुलिस ने बताया कि आरोपी अपनी टेस्ला कार पर 'भारत सरकार' और 'IAS' लिखवाकर धौंस जमाता था। उसने खुद को एक रसूखदार अधिकारी के रूप में पेश करके लोगों को अपने जाल में फंसा रखा था। फिलहाल पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इन तमाम महंगी वस्तुओं का वह किस तरह से उपयोग करता था और इनका उसके ठगी के नेटवर्क से क्या संबंध है।
धौंस दिखाकर ठगी का साम्राज्य
जांच में सामने आया है कि मनीष गुप्ता ने खुद को आईएएस अधिकारी बताकर लोगों पर अपना प्रभाव जमाया और अवैध तरीके से मोटी संपत्ति अर्जित की। पुलिस को उसके पास से एक फर्जी आईएएस अधिकारी का पहचान पत्र भी मिला है। पुलिस का कहना है कि जिस तरह से वह लोगों को प्रभावित करता था, उससे साफ है कि वह काफी समय से इस तरह के फर्जीवाड़े में शामिल था। हालांकि, उसके द्वारा अजीत डोभाल का नाम लिए जाने के बाद पुलिस सतर्क है और किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं कर रही है। यह जांच का विषय है कि क्या वास्तव में उसका किसी सरकारी एजेंसी से कोई नाता था या यह सिर्फ एक बचाव की चाल है।
आर्थिक अपराध इकाई (EOU) करेगी पड़ताल
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अब इसकी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। खगड़िया एसपी ने जानकारी दी है कि इस पूरे जालसाजी कांड की जांच अब पटना की आर्थिक अपराध अनुसंधान इकाई यानी EOU की टीम करेगी। जांच के दौरान आरोपी की अवैध संपत्ति, उसके बैंक खातों के लेनदेन, क्रेडिट-डेबिट कार्ड का इस्तेमाल और अन्य वित्तीय गतिविधियों को खंगाला जाएगा। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इस पूरे मामले में किसी और व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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