बरसात में मवेशियों के लिए बढ़ा बीमारियों का खतरा, पशु चिकित्सक ने दी सावधान रहने की सलाह छत्तीसगढ़ एक दिन पहले 4
बरसात के दौरान पशुओं में गलघोंटू और एकटांगिया जैसी गंभीर बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिनसे बचाव के लिए टीकाकरण अनिवार्य है।

मानसून में मवेशियों की सुरक्षा

बरसात का मौसम अपने साथ कई चुनौतियां लेकर आता है, जिसका असर इंसानों के साथ साथ हमारे मवेशियों पर भी पड़ता है। इस दौरान वातावरण में नमी के कारण पशुओं में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका काफी बढ़ जाती है। विशेष रूप से बड़े पशुओं में गलघोंटू यानी HS और एकटांगिया यानी BQ जैसी बीमारियां सबसे अधिक देखी जाती हैं। पशु चिकित्सकों का मानना है कि यदि समय रहते सावधानी न बरती जाए और उचित उपचार न किया जाए, तो ये बीमारियां घातक साबित हो सकती हैं और पशु की जान भी जा सकती है।

बीमारी की चपेट में आने वाले पशु

बिलासपुर जिला पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सक डॉ राम ओत्तलवार के अनुसार, इन बीमारियों की चपेट में आने वाले पशुओं की आयु सीमा आमतौर पर 4 महीने से लेकर 2 से 4 साल के बीच होती है। अक्सर पशुपालक इस गलतफहमी में रहते हैं कि उनका पशु पूरी तरह से स्वस्थ और तंदुरुस्त है, इसलिए उसे बीमारी नहीं होगी। हालांकि, हष्ट पुष्ट दिखने वाले मवेशी भी इन खतरनाक बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। इन रोगों का मुख्य कारण बैक्टीरिया है, जो बरसात के मौसम में तेजी से पनपते हैं।

गलघोंटू और एकटांगिया का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, गलघोंटू एक श्वसन संबंधी बीमारी है जो सांस के जरिए एक पशु से दूसरे पशु में बहुत तेजी से फैलती है। इसी कारण यह जरूरी है कि यदि किसी पशु में इसके लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत स्वस्थ जानवरों के झुंड से अलग कर देना चाहिए। बीमारी को फैलने से रोकने के लिए क्वारंटीन एक प्रभावी उपाय है।

मृत पशुओं का सही निपटारा है जरूरी

पशु चिकित्सकों ने एक बहुत महत्वपूर्ण चेतावनी दी है कि कभी-कभी बीमारी के कारण पशु की अचानक मृत्यु हो जाती है। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग शव को खुले स्थान या घास के मैदान में छोड़ देते हैं। यह बेहद खतरनाक है क्योंकि मृत पशु के शरीर से बैक्टीरिया मिट्टी और आसपास की घास में फैल जाते हैं। जब दूसरे पशु उसी स्थान पर चरने आते हैं, तो वे बैक्टीरिया उनके पेट में चले जाते हैं और वे भी बीमार हो जाते हैं। इसलिए, मृत पशुओं के शवों का वैज्ञानिक और सही तरीके से निपटारा करना अनिवार्य है ताकि संक्रमण की कड़ी को तोड़ा जा सके।

टीकाकरण है बचाव का एकमात्र उपाय

इन संक्रामक बीमारियों से पशुओं को बचाने का सबसे सटीक तरीका टीकाकरण है। पशु चिकित्सा विभाग की ओर से बिलासपुर जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान संचालित किया जा रहा है। पशुपालकों से अपील की गई है कि वे किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें और अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय या चिकित्सा केंद्र में जाकर मवेशियों का टीकाकरण सुनिश्चित करें।

सावधानी के अन्य महत्वपूर्ण टिप्स

  • यदि किसी पशु में बीमारी के लक्षण नजर आएं, तो उसे बिना देरी किए अन्य पशुओं से अलग करें।
  • संक्रमित क्षेत्र की घास और हरा चारा पशुओं को खिलाने से बचें, क्योंकि इसमें बैक्टीरिया हो सकते हैं।
  • पशु चिकित्सा विभाग द्वारा चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान का पूरा लाभ उठाएं।
  • पशुओं के रहने वाले स्थान को साफ सुथरा रखें और संक्रमण की संभावना को कम करें।
  • बीमार पशु का उपचार केवल पंजीकृत पशु चिकित्सकों की देखरेख में ही करवाएं।

बरसात के मौसम में सावधानी ही बचाव का सबसे बड़ा जरिया है। पशुपालकों की थोड़ी सी सजगता उनके मवेशियों को जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रख सकती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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