क्लेम चार साल अटकाने पर बीमा कंपनी को झटका, आयोग का आदेश: ब्याज समेत चुकाएं 28 लाख रुपए छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 3
बिलासपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए आग में जली एक्सीवेटर मशीन के मामले में 28.24 लाख रुपए से अधिक की राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त तकनीकी साक्ष्य के बिना किसी बीमा दावे को खारिज नहीं किया जा सकता।

बीमा पॉलिसी लेने वाले लाखों उपभोक्ताओं के लिए बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का एक ताजा फैसला महत्वपूर्ण नजीर बनकर सामने आया है। आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए बीमाधारक के पक्ष में निर्णय सुनाया। पीठ ने दो टूक कहा कि महज अनुमान या अधूरी दलीलों के सहारे किसी वैध बीमा दावे को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि कंपनी के पास पुख्ता तकनीकी प्रमाण नहीं हैं तो क्लेम ठुकराना उपभोक्ता अधिकारों का हनन माना जाएगा। इसी आधार पर आयोग ने कंपनी को 28.24 लाख रुपए से अधिक की राशि ब्याज सहित अदा करने का निर्देश दिया।

यह प्रकरण सिर्फ एक बीमा दावे तक सीमित नहीं है, बल्कि उन तमाम पॉलिसीधारकों के लिए भी मायने रखता है जो अपने जायज क्लेम के लिए वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ते रहते हैं। आयोग ने अपने आदेश में साफ किया कि बीमा कंपनियों को दावा खारिज करने से पहले ठोस तकनीकी साक्ष्य और स्पष्ट जांच रिपोर्ट सामने रखनी होगी, अन्यथा इसे सेवा में कमी ही माना जाएगा। माना जा रहा है कि यह फैसला आगे आने वाले इसी तरह के मामलों के लिए भी एक अहम मिसाल साबित होगा।

आग में जल गई थी एक्सीवेटर मशीन

यह मामला कोरबा निवासी एके शर्मा से जुड़ा है। उनकी वोल्वो क्राउलर एक्सीवेटर मशीन 7 अगस्त 2021 को एसईसीएल की बिजारी खदान में काम के दौरान अचानक आग लगने से क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस मशीन का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट प्लांट एंड मशीनरी पॉलिसी के तहत कराया गया था।

46 लाख से अधिक का दावा

घटना के बाद मशीन को हुए नुकसान का आकलन कराया गया। परिवादी ने मरम्मत और क्षति के आधार पर कंपनी के समक्ष 46.41 लाख रुपए का बीमा दावा प्रस्तुत किया। इसके बाद कंपनी ने मामले की पड़ताल के लिए सर्वेयर नियुक्त किया।

सर्वे रिपोर्ट में शॉर्ट सर्किट की पुष्टि

जांच करने वाले मैक इंश्योरेंस सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट में आग का कारण कंट्रोल पैनल में हुए इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट को बताया। रिपोर्ट में इसे आकस्मिक दुर्घटना माना गया, यानी आग किसी जानबूझकर की गई लापरवाही या नियम उल्लंघन का नतीजा नहीं थी।

कंपनी ने इस आधार पर ठुकराया क्लेम

बीमा कंपनी ने दावा खारिज करते हुए तर्क दिया कि ऑपरेटर मशीन को चालू अवस्था में छोड़कर चला गया था। कंपनी ने इसे पॉलिसी शर्तों का उल्लंघन बताते हुए भुगतान से इनकार कर दिया। इसी निर्णय को चुनौती देते हुए परिवादी उपभोक्ता आयोग पहुंचा।

आयोग ने क्यों खारिज की कंपनी की दलील

आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल तथा सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ ने तकनीकी तथ्यों की बारीकी से समीक्षा की। सुनवाई में सामने आया कि मशीन में ऑटो-कट तकनीक लगी थी, जिसके तहत चाबी बंद करने के तीन मिनट बाद मशीन स्वतः बंद हो जाती है। आयोग ने माना कि ऐसी स्थिति में ऑपरेटर की लापरवाही साबित नहीं होती। साथ ही कंपनी यह भी प्रमाणित नहीं कर सकी कि ऑपरेटर ने जानबूझकर ऐसी कोई गलती की जिससे आग लगी हो।

ब्याज सहित भुगतान का आदेश

आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह डेढ़ महीने के भीतर भुगतान करे। आदेश के मुताबिक कंपनी को मशीन की क्षति के एवज में 27.94 लाख रुपए, मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार रुपए और वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपए देने होंगे। इसके अतिरिक्त वर्ष 2022 से भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी चुकाना होगा।

उपभोक्ताओं के लिए क्यों खास है यह फैसला

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय बीमा क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ाने वाला है। इससे स्पष्ट संदेश गया है कि किसी भी क्लेम को खारिज करने के लिए केवल आशंका या अनुमान काफी नहीं है। बीमा कंपनियों को तकनीकी रूप से मजबूत और प्रमाणित आधार पेश करना होगा।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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