मध्य प्रदेश
53 मिनट पहले
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मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर चल रही सियासी बहस के बीच भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के एक बयान ने नया विवाद छेड़ दिया है। अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले शर्मा का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राज्य सरकार प्रदेश में यूसीसी लागू करने की तैयारी में जुटी है। भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से लगातार तीसरी बार चुनकर आए शर्मा के इस बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
मुस्लिम आबादी पर विधायक का बयान
बुधवार को रामेश्वर शर्मा ने कहा कि देश के कई इलाकों की डेमोग्राफी में बदलाव देखने को मिल रहा है और मुस्लिम आबादी बढ़ने के कारण समाज में तनाव तथा भय का माहौल बन रहा है। उनके मुताबिक एक विशेष धर्म के लोगों की बढ़ती संख्या कई क्षेत्रों की सामाजिक संरचना को प्रभावित कर रही है, और यही स्थिति समान नागरिक संहिता एवं जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दों को और ज्यादा अहम बना देती है।
शर्मा ने कहा कि पूरे देश में यह मांग लगातार जोर पकड़ रही है कि किसी भी परिवार में तीन से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुसलमान 5 बीवी रखते हैं और 25 बच्चे पैदा कर रहे हैं, जिसके चलते कई इलाकों में डेमोग्राफिक संकट खड़ा हो रहा है। विधायक ने मांग की कि इस पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और देश में सभी के लिए एक जैसा कानून लागू होना चाहिए।
कांग्रेस पर साधा निशाना
अपने बयान में शर्मा ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने भी परिवार नियोजन की जरूरत पर बल दिया था, इसलिए कांग्रेस को इस मुद्दे पर सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच भ्रम फैलाने के बजाय कांग्रेस को जनसंख्या नियंत्रण और यूसीसी जैसे विषयों पर सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
विधायक ने मध्य प्रदेश के कांग्रेस नेताओं से अपील की कि वे राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रयासों का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि यह कदम किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम पहल है।
यूसीसी पर मुख्यमंत्री का रुख
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दो दिन पहले ही ऐलान किया था कि मध्य प्रदेश में जल्द ही समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। सोमवार को मुख्यमंत्री ने कहा था कि उनकी सरकार यूसीसी लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस सिलसिले में जनता तथा कानूनी विशेषज्ञों से सुझाव लिए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा था कि विवाह और पारिवारिक मामलों में धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की व्यवस्था अब आवश्यक नहीं रह गई है, और राज्य को एक समान नागरिक संहिता की जरूरत है।
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