साइबर ठगी के पीड़ितों पर दोहरी मार, महज ₹500 वापस पाने के लिए भरना पड़ रहा ₹1000 का क्षतिपूर्ति बॉन्ड मध्य प्रदेश 4 घंटे पहले 6
मध्य प्रदेश में साइबर धोखाधड़ी के शिकार लोगों को अपने ही फ्रीज हुए पैसे वापस पाने के लिए भारी-भरकम स्टांप ड्यूटी चुकानी पड़ रही है, जिसे कम करने के लिए अब पुलिस ने सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है।

मध्य प्रदेश में साइबर अपराधियों के जाल में फंसकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवाने वाले लोगों को अब एक अजीबोगरीब आर्थिक दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के लागू होने के बाद, साइबर ठगी का शिकार हुए लोगों के बैंक खातों से ठगे गए और बाद में होल्ड कराए गए पैसों को वापस दिलाने की प्रक्रिया तो शुरू हो गई है, लेकिन यह कानूनी प्रक्रिया पीड़ितों की जेब पर और भारी पड़ रही है। दरअसल, अपने ही पैसे वापस पाने के लिए पीड़ितों को एक बड़ा कानूनी खर्च उठाना पड़ रहा है, जो उनकी परेशानी को दोगुना कर रहा है। वर्तमान व्यवस्था के तहत पीड़ितों को अपनी ही राशि वापस लेने के लिए ₹1000 का भारी-भरकम क्षतिपूर्ति बॉन्ड भरना पड़ रहा है, जो कई मामलों में वापस मिलने वाली रकम से भी बहुत ज्यादा है।

कानून की पेचीदगी और स्टांप ड्यूटी का बोझ

इस विसंगति के पीछे मुख्य वजह पुराना कानून और नियमों की अस्पष्टता है। भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 के नियमों के अनुसार, मध्य प्रदेश में किसी भी प्रकार के क्षतिपूर्ति बॉन्ड (इंडेम्निटी बॉन्ड) के लिए न्यूनतम ₹1000 की स्टांप ड्यूटी चुकाना अनिवार्य है। इस कानून की वजह से राज्य में एक बेहद अजीब स्थिति पैदा हो गई है। उदाहरण के लिए, यदि किसी नागरिक के खाते से साइबर अपराधियों ने महज ₹500 की ठगी की है और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उस रकम को ठग के खाते में होल्ड करवा दिया है, तो भी पीड़ित को वह ₹500 वापस पाने के लिए ₹1000 का स्टांप पेपर खरीदना होगा। अपनी ही छोटी रकम को वापस पाने के लिए पीड़ित को उससे दोगुनी राशि स्टांप ड्यूटी के रूप में सरकार को देनी पड़ रही है। इस समस्या की एक बड़ी वजह यह भी है कि इस मामले से जुड़ी SOP में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है कि किस रकम की वापसी पर कितने मूल्य का स्टांप पेपर लिया जाना चाहिए।

राहत देने की तैयारी: स्टांप ड्यूटी घटाकर ₹100 करने का प्रस्ताव

इस व्यावहारिक समस्या और पीड़ितों की परेशानी को देखते हुए राज्य की साइबर पुलिस ने अब इस दिशा में सुधारात्मक कदम उठाए हैं। साइबर पुलिस ने मध्य प्रदेश के गृह विभाग को एक औपचारिक प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में यह सिफारिश की गई है कि साइबर ठगी के मामलों में पैसे वापस करने के लिए आवश्यक क्षतिपूर्ति बॉन्ड की स्टांप ड्यूटी को ₹1000 से घटाकर सीधे ₹100 कर दिया जाए। गृह विभाग अब इस जनहित से जुड़े प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजने की तैयारी कर रहा है।

इस संबंध में राज्य के साइबर आईजी शियाज ए. ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने बताया कि यह क्षतिपूर्ति बॉन्ड लेना कानूनी रूप से बेहद जरूरी है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि बैंक खाताधारक को रकम वापस मिलने के बाद, यदि कोई दूसरा दावेदार अदालत का रुख करता है या फिर कोर्ट किसी अन्य कानूनी कारण से उस राशि को वापस मांगता है, तो राशि प्राप्त करने वाला व्यक्ति उस रकम को लौटाने के लिए उत्तरदायी रहे।

मध्य प्रदेश की तुलना में देश के कुछ अन्य राज्यों ने इस समस्या का समाधान पहले ही निकाल लिया है। उदाहरण के तौर पर, राजस्थान में इस बॉन्ड की राशि को घटाकर केवल ₹200 कर दिया गया है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर और कई अन्य राज्यों ने भी अपने स्तर पर इस स्टांप ड्यूटी की रकम को काफी कम कर दिया है ताकि साइबर ठगी के पीड़ितों को राहत मिल सके।

होल्ड की गई राशि वापस पाने की ऑनलाइन प्रक्रिया

यदि आप भी किसी साइबर धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं और पुलिस की मदद से आपके पैसे ठग के बैंक खाते में होल्ड करा दिए गए हैं, तो आप निम्नलिखित ऑनलाइन प्रक्रिया को अपनाकर अपनी राशि वापस पाने के लिए दावा पेश कर सकते हैं:

  • सबसे पहले आपको सरकार के आधिकारिक मनी रेस्टोरेशन सिटीजन पोर्टल पर जाना होगा।
  • पोर्टल पर पहुंचने के बाद, आपको अपनी साइबर शिकायत के पावती नंबर (एक्नॉलेजमेंट नंबर) या फिर अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आए OTP के जरिए सुरक्षित रूप से लॉग-इन करना होगा।
  • सफलतापूर्वक लॉग-इन करने के बाद, आपके कंप्यूटर या मोबाइल की स्क्रीन पर स्पष्ट रूप से वह जानकारी दिखाई देगी कि किस बैंक खाते में आपकी कितनी राशि होल्ड या फ्रीज की गई है।
  • इसके बाद आपको स्क्रीन पर मांगी गई सभी आवश्यक जानकारियां दर्ज करनी होंगी, जैसे कि आपका बैंक विवरण, बैंक का IFSC कोड, धोखाधड़ी का शिकार हुई कुल रकम का विवरण, आपका पैन कार्ड, पुलिस FIR की प्रति और यदि उपलब्ध हो तो अदालत का रिफंड आदेश अपलोड करना होगा।
  • सभी आवश्यक दस्तावेज और विवरण सही-सही अपलोड करने के बाद, आपको स्क्रीन पर दिख रहे 'रेस रिक्वेस्ट फॉर फंड' पर क्लिक करना होगा।
  • ऐसा करते ही सिस्टम द्वारा एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूनिक आईडी नंबर) जनरेट की जाएगी।
  • यह रिक्वेस्ट सीधे संबंधित मामले की जांच कर रहे जांच अधिकारी के पास पहुंच जाएगी।
  • जांच अधिकारी द्वारा आपके दस्तावेजों का पूरी तरह सत्यापन करने और आपसे नियमानुसार क्षतिपूर्ति बॉन्ड प्राप्त करने के बाद, होल्ड की गई रकम सीधे आपके बैंक खाते में सुरक्षित रूप से रिफंड कर दी जाएगी।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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