बिहार
एक दिन पहले
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तरारी की धरती ने एक बार फिर देशभर में अपनी नई पहचान दर्ज कराई है। कभी जातीय टकराव और आपसी विवादों के कारण सुर्खियों में रहने वाला यह इलाका अब अपने युवाओं की प्रतिभा के लिए जाना जाने लगा है। यहां के नौजवान अपनी मेहनत और लगन के बल पर राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश में अपनी छाप छोड़ रहे हैं। इसी कड़ी में भोजपुर के शुभम कुमार ने राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल कर अपने परिवार के साथ-साथ समूचे बिहार का सिर गर्व से ऊंचा किया है।
शुभम इस समय अपने परिवार के साथ आरा के जीरो माइल इलाके में रहते हैं। उनके पिता अरुण कुमार सिंह भारतीय सेना में तैनात हैं। अनुशासन और संघर्ष का पाठ उन्हें घर से ही मिला, और इसी का परिणाम आज इस बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि के रूप में सामने आया है।
अहमदाबाद में जीता स्वर्ण पदक
शुभम ने गुजरात के अहमदाबाद स्थित गुजरात विद्यापीठ विश्वविद्यालय में आयोजित 15वीं एमपीएआई राष्ट्रीय बायथल-ट्रायथल चैंपियनशिप 2026 में भाग लिया था। इस कठिन और चुनौतीपूर्ण मुकाबले में देशभर के 44 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन शुभम ने अपने दमदार प्रदर्शन और मजबूत हौसले के साथ अंडर-15 वर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया।
बायथलॉन जैसे खेल के बारे में आम लोगों को कम ही जानकारी होती है, जबकि यह शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा लेता है। इस प्रतियोगिता में खिलाड़ी को पहले 800 मीटर की दौड़ पूरी करनी होती है, फिर बिना रुके 100 मीटर तैराकी करनी पड़ती है और अंत में दोबारा 800 मीटर की दौड़ लगानी होती है। इस कठिन क्रम को पार करने के लिए असाधारण धैर्य और फिटनेस जरूरी होती है, जिसे शुभम ने पूरी तरह साबित कर दिखाया।
बरसों की मेहनत का नतीजा
शुभम को यह कामयाबी एक रात में नहीं मिली। वे लंबे समय से लगातार मेहनत करते आ रहे हैं। साल 2024 में उन्होंने अंडर-13 वर्ग में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीता था, वहीं 2025 में अंडर-15 वर्ग में कांस्य पदक हासिल कर अपनी निरंतरता बनाए रखी। लगातार तीन वर्षों तक राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना उनकी अटूट लगन और परिश्रम का साफ प्रमाण है।
पटना में हुई चयन प्रतियोगिता में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था, जहां विभिन्न वर्गों से कुल 29 खिलाड़ियों को चुना गया था। उनकी इस सफलता में कोच अरुण कुमार गोंड का खास योगदान रहा है, जिन्होंने न सिर्फ शुभम की प्रतिभा को पहचाना, बल्कि सही दिशा देकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार किया।
अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर नजर
अब शुभम का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मुकाबला है। वे आगामी अक्टूबर महीने में पुर्तगाल में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भोजपुर और बिहार के लिए यह बेहद गर्व की बात है कि आरा जैसे छोटे शहर का एक युवा खिलाड़ी अब विश्व मंच पर तिरंगा लहराएगा। शुभम का सफर यह सिखाता है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता जरूर मिलती है।
लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा
तरारी की धरती से निकला यह युवा आज उन लाखों नौजवानों के लिए प्रेरणा बन चुका है, जो जीवन में कुछ बड़ा करने का सपना संजोते हैं। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि किसी भी इलाके की असली पहचान उसके बीते कल से नहीं, बल्कि वहां के युवाओं की कामयाबी और आने वाले कल की उम्मीदों से तय होती है। शुभम का सफर अभी शुरुआती दौर में है और आने वाले समय में वे देश के लिए और बड़े कीर्तिमान स्थापित करेंगे। उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरा देश शुभकामनाएं दे रहा है।
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