भोजपुर की एकेडमी का कमाल, बिहार पुलिस में एक साथ 60 युवाओं का चयन, 10 बेटियां भी बनीं सिपाही बिहार 18 घंटे पहले 5
बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा में भोजपुर की हिंदुस्तान फिजिकल एकेडमी से 60 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, जिनमें 50 पुरुष और 10 महिलाएं शामिल हैं। इस सफलता ने पूरे जिले का गौरव बढ़ा दिया है।

कठिन परिश्रम का कोई दूसरा रास्ता नहीं होता—इस कहावत को भोजपुर जिले के होनहार युवाओं ने सच कर दिखाया है। हाल ही में घोषित बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा के नतीजों ने पूरे इलाके को गर्व से भर दिया है। इस कामयाबी की सबसे चमकदार कहानी भोजपुर की हिंदुस्तान फिजिकल एकेडमी से सामने आई है, जहां से एक साथ 60 अभ्यर्थियों ने खाकी वर्दी पहनने का सपना पूरा किया है।

इतनी बड़ी सफलता के बाद न केवल संस्थान में, बल्कि पूरे भोजपुर जिले में उत्सव जैसा माहौल है। चयनित अभ्यर्थियों के घरों पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

बेटियों ने भी दर्ज कराई मजबूत मौजूदगी

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि की खास बात यह रही कि चयनित 60 अभ्यर्थियों में आधी आबादी ने भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। एकेडमी से कुल 50 पुरुष और 10 महिला अभ्यर्थियों ने अंतिम चयन सूची में जगह बनाई है।

इन बेटियों की कामयाबी ने यह साबित कर दिया कि सही दिशा और हौसला मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में लड़कों से पीछे नहीं रहतीं। विपरीत हालात और सीमित संसाधनों के बावजूद इन युवाओं ने अपनी जिद और लगन के बूते बिहार पुलिस में सिपाही बनने का गौरव हासिल किया।

जादू नहीं, अनुशासित रणनीति का नतीजा

इस उपलब्धि के पीछे कोई जादुई तरकीब नहीं, बल्कि कठोर और अनोखी रणनीति रही। एकेडमी के सभी अभ्यर्थियों की तैयारी का तरीका एक जैसा और बेहद अनुशासित था। इन्होंने अपने प्रशिक्षण के लिए एक खास सिद्धांत बनाया था—चुनौती को मानक से बड़ा मानना। यानी जब लक्ष्य मुश्किल हो, तो तैयारी को उससे भी अधिक कठिन बनाना।

इसी मूलमंत्र को अपनाकर इन युवाओं ने मैदान पर पसीना बहाया। उदाहरण के तौर पर, परीक्षा के मानक के अनुसार 1600 मीटर की दौड़ 4 मिनट में पूरी करनी थी, लेकिन ये अभ्यर्थी खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करने के लिए 4 मिनट में 1700 मीटर की दूरी तय करने का अभ्यास करते थे। इसी अतिरिक्त मेहनत और ओवर-प्रैक्टिस ने परीक्षा के दिन उनका दबाव कम कर दिया और जीत दिलाई।

वर्षों के संघर्ष को मिला मुकाम

इस भीड़ में कुछ कहानियां ऐसी भी हैं जो संघर्ष और धैर्य की मिसाल पेश करती हैं। सिपाही अभ्यर्थी डेविड पासवान, नीतू कुमारी और आणि कुमारी उन्हीं जुझारू नामों में शामिल हैं, जिन्होंने इस परीक्षा को पास करने के लिए सालों तक इंतजार किया।

ये अभ्यर्थी कई वर्षों से लगातार असफलताओं और समाज के तानों का सामना करते हुए तैयारी में जुटे रहे। कई बार कदम डगमगाए, मन में निराशा भी आई, पर इन्होंने कभी हार नहीं मानी। आखिरकार वर्षों की मेहनत रंग लाई और इनकी लगन को सफलता का मुकाम मिल गया।

आने वाले अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा

हिंदुस्तान फिजिकल एकेडमी से निकले इन 60 सिपाहियों की यह कहानी सिर्फ एक परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो सरकारी नौकरी का सपना देखते हैं।

इन अभ्यर्थियों ने दिखा दिया है कि सही मार्गदर्शन, अडिग तैयारी और खुद पर अटूट भरोसा हो तो हर बाधा पार की जा सकती है। आज ये सभी 60 युवा बिहार पुलिस का हिस्सा बनकर राज्य की सुरक्षा और सेवा के लिए पूरी तरह तैयार हैं, और इनकी यह कामयाबी आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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