भीलवाड़ा: मेनाल के झरने ने पकड़ा रौद्र रूप, 150 फीट की ऊंचाई से गिरते पानी का रोमांच देखने उमड़ी भीड़ राजस्थान एक घंटा पहले 2
भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध मेनाल वॉटरफॉल भारी बारिश के बाद पूरी तरह उफान पर है। ऐतिहासिक मंदिरों और प्राकृतिक सुंदरता के संगम को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं।

मानसून की मेहरबानी और मेनाल की छटा

राजस्थान के भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिले की सरहद पर स्थित मेनाल का सुप्रसिद्ध जलप्रपात अब अपने पूरे शबाब पर है। हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश ने इस पर्यटन स्थल की पूरी तस्वीर बदल दी है। करीब 150 फीट गहरी खाई में जब पानी की मोटी धारा गिरती है, तो उसकी गूंज दूर तक सुनाई देती है। बारिश के चलते मेनाल के आसपास का पूरा इलाका हरियाली की चादर से ढक गया है, जिसने पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। मानसून के इस सुहाने मौसम में प्रकृति का यह रूप देखने के लिए राजस्थान के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी सैलानियों की भारी भीड़ मेनाल पहुंच रही है।

इतिहास और प्रकृति का अनूठा मेल

भीलवाड़ा जिले के बिजौलिया से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मेनाल केवल अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राचीन धरोहर के लिए भी मशहूर है। यहां 12वीं और 13वीं शताब्दी के चौहानकालीन मंदिरों की एक श्रृंखला मौजूद है। पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी और उस दौर की अद्भुत स्थापत्य कला यहां आने वाले हर व्यक्ति का मन मोह लेती है। बारिश के दौरान जब प्राचीन मंदिरों के पीछे से झरना पूरे वेग के साथ नीचे गिरता है, तो यह दृश्य किसी फिल्म जैसा अहसास कराता है। यही कारण है कि पर्यटक न केवल झरने की सुंदरता का लुत्फ उठाने आते हैं, बल्कि वे इन ऐतिहासिक मंदिरों को भी करीब से देखना पसंद करते हैं।

पर्यटकों की पहली पसंद बना मेनाल

बारिश के इस मौसम में मेनाल का कायाकल्प हो जाता है। जिन पहाड़ियों पर कुछ समय पहले सूखी घास नजर आती थी, वे अब पूरी तरह से हरी-भरी हो गई हैं। झरने से उड़ने वाली पानी की फुहारें और आसपास का ठंडा वातावरण पर्यटकों को एक सुकून भरा अनुभव देता है। कई सैलानी अपने मोबाइल और कैमरों के जरिए इस यादगार नजारे को कैद करते हुए दिखाई देते हैं। मानसून के दौरान मेनाल हर साल हजारों लोगों का पसंदीदा गंतव्य बन जाता है। यहां मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे पड़ोसी राज्यों से भी परिवार और दोस्तों के साथ बड़ी संख्या में लोग पिकनिक मनाने आते हैं। युवाओं के बीच तो यह स्थान सेल्फी और फोटोग्राफी के लिए हॉटस्पॉट बन गया है। इस साल जून के महीने में मानसून की धीमी शुरुआत के कारण झरने में पानी की आवक कम थी, लेकिन अब तेज बारिश के बाद झरना अपने पूरे वेग और वैभव के साथ बह रहा है।

मेनाल तक पहुंचने के आसान रास्ते

मेनाल का सफर रोमांचक है, बशर्ते आपको सही रास्ते की जानकारी हो। यह स्थान भीलवाड़ा से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर भीलवाड़ा-कोटा राजमार्ग पर स्थित है। यात्रियों की सुविधा के लिए यहां पहुंचने के मुख्य मार्गों का विवरण इस प्रकार है:

  • भीलवाड़ा से आने वाले पर्यटक बिजौलिया के रास्ते आसानी से मेनाल पहुंच सकते हैं।
  • चित्तौड़गढ़ की ओर से आने वाले लोगों के लिए बस्सी और बेगू होकर गुजरने वाला मार्ग सबसे सुविधाजनक है।
  • बूंदी और कोटा की तरफ से आने वाले पर्यटक सीधे भीलवाड़ा-कोटा हाईवे का इस्तेमाल कर सकते हैं।

यात्रा के साधनों की बात करें तो अपनी निजी कार या बाइक से आना सबसे बेहतर विकल्प है, क्योंकि इससे रास्ते में रुककर प्राकृतिक नजारों का आनंद लिया जा सकता है। टैक्सी की सुविधा भी उपलब्ध रहती है। यदि कोई बस से यात्रा करना चाहता है, तो उसे पहले बिजौलिया पहुंचना होगा और वहां से स्थानीय साधन या टैक्सी लेकर गंतव्य तक जाना होगा। यदि आप रेल मार्ग से आना चाहते हैं, तो मंडलगढ़ यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। कोटा जंक्शन से भी सड़क मार्ग के जरिए मेनाल पहुंचना काफी सरल है। प्रशासन और स्थानीय लोगों ने पर्यटकों से अपील की है कि झरने के आसपास सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें और फिसलन भरी जगहों पर सतर्कता बरतें ताकि इस खूबसूरत सफर का आनंद सुरक्षित रूप से लिया जा सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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