उपनाम: ग्रामीण संस्कृति
झारखंड की खास सब्जी फुटकून: साल में मात्र 15 दिन मिलती है, स्वाद में मटन को भी पीछे छोड़ती है
मानसून की दस्तक के साथ ही झारखंड के बाजारों में फुटकून सब्जी की बहार आ गई है, जो अपनी पौष्टिकता और लाजवाब स्वाद के लिए मशहूर है। महज कुछ दिनों के लिए मिलने वाली इस सब्जी की कीमत ₹600 प्रति किलो तक है।
भरतपुर के गांवों में आज भी बरकरार है चूल्हे पर खाना पकाने की परंपरा
आधुनिक युग में गैस चूल्हों के बढ़ते चलन के बावजूद भरतपुर के कई इलाकों में मिट्टी और गोबर से बने चूल्हों पर भोजन पकाने का रिवाज अब भी कायम है।
ग्रामीण भारत की पहचान: आधुनिक युग में भी अनाज सफाई और रोजगार का मुख्य आधार है पारंपरिक सूप
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में आज भी बांस से बना सूप रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बना हुआ है। यह न केवल अनाज को साफ करने के लिए एक प्रभावी उपकरण है, बल्कि कई स्थानीय कारीगरों के लिए आजीविका का जरिया भी है।
गांव की बुजुर्ग महिलाएं बनाती थीं हाथ का पंखा 'बेना', बिजली गुल होने पर आज भी बनता है सहारा
करीब 30 साल पहले गांव की लड़कियां और महिलाएं फटी बोरी और गेहूं के डंठल से हाथ का पंखा यानी बेना तैयार करती थीं, जो बिजली कटने पर आज भी ग्रामीण इलाकों में काम आता है।