मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू करेंगे पाकिस्तान का दौरा, 10 साल बाद होगी ऐसी हाई-प्रोफाइल यात्रा विश्व एक घंटा पहले 5
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू 20 से 22 अक्टूबर तक पाकिस्तान की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे, जहाँ वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ चर्चा करेंगे। इस दौरे पर भारत की पैनी नजर बनी हुई है क्योंकि इसमें सुरक्षा और रक्षा सहयोग जैसे संवेदनशील विषयों पर बातचीत होने की संभावना है।

पाकिस्तान के दौरे पर मालदीव के राष्ट्रपति

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू पाकिस्तान की यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह दौरा 20 से 22 अक्टूबर के बीच संपन्न होगा। एक दशक से अधिक का लंबा समय बीत जाने के बाद, मालदीव के किसी राष्ट्राध्यक्ष का यह पहला पाकिस्तान दौरा है। राष्ट्रपति मुइज्जू को यह आमंत्रण पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा दिया गया था। हिंद महासागर के बदलते घटनाक्रम और क्षेत्रीय भू-राजनीति के बीच इस यात्रा को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत की सुरक्षा चिंताओं पर रहेगी नजर

क्षेत्रीय राजनीति के जानकार मान रहे हैं कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखेगा। इसका मुख्य कारण मालदीव और पाकिस्तान के बीच संभावित रक्षा और सुरक्षा सहयोग से जुड़ी बातचीत है। मालदीव के साथ भारत के सामरिक रिश्तों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, इस मुलाकात से निकलने वाले किसी भी समझौते पर नई दिल्ली की नजर बनी रहेगी। अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गयूम आखिरी मालदीवई राष्ट्रपति थे, जिन्होंने 6-7 मई 2015 में पाकिस्तान की यात्रा की थी।

द्विपक्षीय संबंधों और समझौतों का रोडमैप

राष्ट्रपति मुइज्जू पाकिस्तान प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अतिरिक्त, वह पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से भी मुलाकात करेंगे। यह कूटनीतिक यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 60 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में हो रही है। उल्लेखनीय है कि मालदीव और पाकिस्तान के बीच आधिकारिक तौर पर वर्ष 1966 में राजनयिक संबंध स्थापित किए गए थे।

किन विषयों पर होगी चर्चा

मालदीव के राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस दौरान कई अहम क्षेत्रों में सहयोग को लेकर चर्चा की जाएगी। वार्ता के मुख्य बिंदुओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • व्यापार और आर्थिक निवेश को बढ़ावा देना।
  • पर्यटन के क्षेत्र में तालमेल बैठाना।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए साझा प्रयास।
  • कृषि क्षेत्र में आपसी सहयोग।
  • लोगों के बीच संपर्क (पीपल-टू-पीपल कांटेक्ट) को मजबूत करना।

इन आर्थिक और सामाजिक मुद्दों के अलावा, क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के विषयों पर भी दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद होने की पूरी उम्मीद है। कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिल सकती है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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