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49 मिनट पहले
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फ्रांस में उपद्रवियों पर सख्त कार्रवाई का दौर
फ्रांस में पिछले तीन दिनों से जारी हिंसा और अराजकता के माहौल के बीच प्रशासन ने कड़ा कदम उठाना शुरू कर दिया है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पुलिस ने अब तक 2,400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। सिर्फ रविवार के दिन ही 2,000 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इस गंभीर स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने सख्त लहजे में कहा है कि जिन लोगों ने सड़कों पर उतरकर तोड़फोड़ की है और तबाही मचाई है, उन्हें अब इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।
फ्रांस के शहरों में लूटपाट और आगजनी की घटनाएँ
राष्ट्रपति मैक्रों ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि अति-वामपंथी समूहों से जुड़े प्रदर्शनकारियों और उनके साथ मिले उपद्रवियों ने देश के विभिन्न शहरों में जमकर लूटपाट की है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फ्रांस के 148 अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन किए गए, जिनमें 5 लाख से ज्यादा लोग शामिल थे। इन प्रदर्शनों की आड़ में दुकानों को निशाना बनाया गया और सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुँचाया गया है। प्रशासन ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि लूटपाट में शामिल लोगों को हर हाल में नुकसान की भरपाई करनी होगी।
दंगाइयों के खिलाफ कड़ा रुख
फ्रांस में अब उपद्रवियों के खिलाफ एक व्यवस्थित कार्रवाई शुरू की गई है। प्रशासन हर एक उपद्रवी की पहचान करने की प्रक्रिया में जुटा है। यह कदम उस नियम की याद दिलाता है जिसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लागू किया था, जिसके तहत सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले से ही वसूली की जाती है। इसी तर्ज पर मैक्रों ने भी चेतावनी दी है कि जिन्होंने कानून को हाथ में लेकर तबाही फैलाई है, उन्हें दंडित किया जाएगा और नुकसान की भरपाई करवाई जाएगी।
जिम्मेदारी और न्याय का संकल्प
राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय व्यवस्था जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप काम कर रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब भी कोई अपराध होता है, तो उसके खिलाफ उचित कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य है। मैक्रों ने कहा, जिन्होंने लूटपाट की है, उन्हें भरपाई करनी होगी। जिन तत्वों ने हमारे गणतंत्र को अस्थिर करने या उसे गिराने की कुत्सित कोशिश की है, उन्हें अपने कृत्यों का जवाब देना ही होगा।
इमारतों और सरकारी कार्यालयों पर हमले
मैक्रों ने कहा कि वे एक अत्यंत गंभीर और नाजुक स्थिति में देश को संबोधित कर रहे हैं। शनिवार 17 अक्तूबर को जो कुछ हुआ, उसने स्थिति को और अधिक चिंताजनक बना दिया है। मुख्य भूमि फ्रांस के साथ-साथ विदेशों में भी अति-वामपंथी प्रदर्शनकारियों ने हिंसा का सहारा लिया। सरकारी इमारतों, व्यावसायिक स्टोरों और महत्वपूर्ण टाउन हॉल को हमलों का निशाना बनाया गया।
इतिहास की धरोहरों को पहुँचाया नुकसान
हिंसक भीड़ ने देश की ऐतिहासिक विरासत को भी नहीं बख्शा। दंगाइयों ने 143 साल पुरानी एक ऐतिहासिक इमारत को आग के हवाले कर दिया। पेरिस के लिमोगेस शहर का 19वीं सदी का सिटी हॉल, जिसने दो-दो विश्व युद्धों की विभीषिका को झेला था, आज उपद्रवियों की आग में जलकर तबाह हो गया है।
प्रदर्शनों में लाखों लोगों की भागीदारी
सरकारी अनुमानों के मुताबिक, पूरे देश में विरोध प्रदर्शनों में लगभग 5 लाख 50 हजार लोगों ने हिस्सा लिया, जबकि कुछ रिपोर्टों में यह संख्या 8 लाख तक होने का अनुमान है। मजदूर संघों, छात्र संगठनों और सक्रिय कार्यकर्ताओं के आह्वान पर ये लोग सड़कों पर उतरे थे। हालात इतने बिगड़ गए कि नकाबपोश दंगाई पुलिस की गाड़ियों को खदेड़ते हुए देखे गए और दुकानों में खुलेआम लूटपाट जारी रही। पेरिस ही नहीं, बल्कि पूरा फ्रांस इस समय हिंसा और आगजनी की चपेट में है।
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