लकड़ी के देसी खिलौनों ने जीता बच्चों का दिल, भरतपुर के बाजारों में जोरों पर मांग राजस्थान एक महीने पहले 16
भरतपुर के बाजारों में हाथ से बने ट्रैक्टर-ट्रॉली, ट्रक, बैलगाड़ी, ऊंट गाड़ी और हवाई जहाज जैसे लकड़ी के पारंपरिक खिलौनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। मजबूत, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल होने के कारण लोग प्लास्टिक की जगह इन देसी खिलौनों को चुन रहे हैं, जिससे स्थानीय कारीगरों को नया रोजगार और पहचान मिल रही है।

भरतपुर के बाजारों में इन दिनों लकड़ी से बने पारंपरिक खिलौने लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। खासकर छोटे बच्चों के बीच इन देसी खिलौनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। प्लास्टिक के खिलौनों से भरे इस दौर में एक बार फिर लकड़ी के मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल खिलौनों की ओर लोगों का रुझान साफ देखा जा सकता है।

बाजार में मौजूद हाथ से बने आकर्षक खिलौने

बाजारों में इस समय लकड़ी से तैयार किए गए ट्रैक्टर-ट्रॉली, ट्रक, बैलगाड़ी, ऊंट गाड़ी और यहां तक कि हवाई जहाज जैसे खिलौने आसानी से उपलब्ध हैं। इनकी सबसे खास बात यह है कि ये सभी खिलौने पूरी तरह हाथों से बनाए जाते हैं, जिनमें पारंपरिक कला की झलक साफ नजर आती है। बच्चों को ये खिलौने देखने में जितने आकर्षक लगते हैं, इनके साथ खेलना उतना ही सुरक्षित भी माना जाता है।

मजबूती और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प

लकड़ी के खिलौनों की सबसे बड़ी खूबी उनकी मजबूती है। जहां प्लास्टिक के खिलौने थोड़ी सी गिरावट में टूट जाते हैं, वहीं लकड़ी के खिलौने लंबे समय तक टिकाऊ बने रहते हैं। इनमें प्लास्टिक का उपयोग नहीं होने के कारण ये पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित हैं। यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों के लिए ऐसे खिलौनों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

कम कीमत में आम लोगों की पहुंच में

कीमत के लिहाज से भी ये खिलौने आम लोगों की पहुंच में हैं। कम दाम में मिलने वाले ये मजबूत और आकर्षक खिलौने बाजार में अच्छी-खासी मांग बनाए हुए हैं। इससे स्थानीय कारीगरों को रोजगार के बेहतर अवसर मिल रहे हैं और उनकी पारंपरिक कला को नया जीवन मिल रहा है।

कारीगर की जुबानी

लकड़ी के खिलौने बनाने वाले कारीगर ओम प्रकाश ने बताया कि इन दिनों बाजार में उनके बनाए खिलौनों की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि लोग अब प्लास्टिक की जगह मजबूत और टिकाऊ विकल्प तलाश रहे हैं, ऐसे में लकड़ी के खिलौने उन्हें बेहतर लग रहे हैं।

ओम प्रकाश के अनुसार, वे सभी खिलौनों को अपने हाथों से तैयार करते हैं, जिनमें ट्रैक्टर, ट्रक, बैलगाड़ी, ऊंट गाड़ी और हवाई जहाज जैसे कई डिजाइन शामिल हैं।

कला और रोजगार को मिल रही मजबूती

भरतपुर के बाजारों में लकड़ी के खिलौनों की बढ़ती मांग न केवल बच्चों के लिए सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प पेश कर रही है, बल्कि स्थानीय कारीगरों की कला और रोजगार को भी मजबूती दे रही है। ये खिलौने अब लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं और खासकर छोटे बच्चों के बीच इन्हें खूब पसंद किया जा रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप