उपनाम: स्थानीय कारीगर
प्लास्टिक के दौर में भी नहीं टूटी बांसफोड़ परिवारों की जिद, कोडरमा में हुनर से जिंदा रखी है पुश्तैनी परंपरा
कोडरमा में बांसफोड़ समुदाय के 30 से 40 परिवार प्लास्टिक की बढ़ती चुनौतियों के बावजूद अपनी पारंपरिक कला को जिंदा रखे हुए हैं। बेहद कम कमाई होने के बावजूद ये लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ीगत हुनर के जरिए पर्यावरण के अनुकूल बांस के सामान बनाकर जीवन यापन कर रहे हैं।
मशीनों के दौर में भी कायम है हाथ का हुनर, बोकारो के 80 वर्षीय बुजुर्ग ऐसे बनाते हैं रस्सी
बोकारो के काशी झरिया गांव में 80 वर्षीय दिगम जी आज भी पुराने प्लास्टिक के बोरों से मजबूत रस्सियां बनाकर अपनी जीविका चला रहे हैं। मशीनों के आने से इस पारंपरिक कला पर संकट है, लेकिन बुजुर्ग कलाकार इसे पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।
लकड़ी के देसी खिलौनों ने जीता बच्चों का दिल, भरतपुर के बाजारों में जोरों पर मांग
भरतपुर के बाजारों में हाथ से बने ट्रैक्टर-ट्रॉली, ट्रक, बैलगाड़ी, ऊंट गाड़ी और हवाई जहाज जैसे लकड़ी के पारंपरिक खिलौनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। मजबूत, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल होने के कारण लोग प्लास्टिक की जगह इन देसी खिलौनों को चुन रहे हैं, जिससे...