'भारत का फ्यूल, भारत की बाइक': पीएम मोदी का यह दांव चला तो खेत-खलिहान से निकलेगा कार और बाइक का तेल राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस एथेनॉल और बायोफ्यूल मॉडल पर भरोसा जता रहे हैं, उसका मकसद सिर्फ पेट्रोल का विकल्प तलाशना नहीं, बल्कि किसान को देश का ऊर्जा उत्पादक बनाना है। प्रयोग सफल रहा तो लाखों करोड़ का तेल आयात घट सकता है और गांवों में नई फैक्ट्रियां खड़ी हो सकती हैं।

जरा कल्पना कीजिए कि जिस खेत में आज गन्ना, मक्का और धान लहलहा रहा है, कल उसी जमीन से आपकी कार और बाइक का ईंधन भी तैयार हो। पेट्रोल पंप पर भरा जाने वाला फ्यूल दुबई, सऊदी अरब या रूस से नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों के खेतों से आए। यह बात भले हैरान करने वाली लगे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस एथेनॉल और बायोफ्यूल मॉडल पर दांव लगा रहे हैं, उसका लक्ष्य ठीक यही है।

अगर यह प्रयोग पूरी तरह कामयाब रहा तो भारत न सिर्फ तेल आयात पर अपनी निर्भरता घटाएगा, बल्कि किसान, रोजगार और अर्थव्यवस्था का पूरा समीकरण ही बदल सकता है। इसकी शुरुआत हो भी चुकी है। बुधवार को हीरो कंपनी ने फ्लेक्स इंजन वाली दो बाइक उतारीं, जो पेट्रोल के साथ-साथ एथेनॉल से भी चलेंगी।

तेल आयात पर भारी निर्भरता

भारत इस समय दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में गिना जाता है। देश अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है। हर साल लाखों करोड़ रुपये विदेशी तेल कंपनियों और तेल उत्पादक देशों की झोली में चले जाते हैं। जैसे ही तेल के दाम चढ़ते हैं, भारत की मुश्किलें बढ़ने लगती हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध हो, पश्चिम एशिया का तनाव हो या फिर समुद्री रास्तों पर पैदा होने वाला संकट, इन सबका असर सबसे पहले भारत के पेट्रोल-डीजल बिल पर नजर आता है। यही वह कमजोर कड़ी है, जिसे मोदी सरकार एथेनॉल के सहारे ताकत में तब्दील करना चाहती है।

खेत से निकलेगा फ्यूल

अब तक किसान को अन्नदाता कहकर पुकारा जाता रहा है, लेकिन एथेनॉल मॉडल कामयाब हुआ तो वही किसान देश का ऊर्जादाता भी बन सकता है। गन्ना, मक्का, टूटे चावल और दूसरे कृषि उत्पादों से एथेनॉल तैयार किया जा सकता है। यानी जो फसल आज मंडी में बिकती है, वही कल रिफाइनरी पहुंचकर कार और बाइक का ईंधन बन सकती है।

इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए केवल खाद्य बाजार के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा। उनके पास एक नया और टिकाऊ खरीदार होगा- देश का ऊर्जा क्षेत्र।

तेल नहीं, किसान तय करेगा भारत की रफ्तार

आज भारतीय अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार के मिजाज पर टिका है। तेल महंगा हुआ तो महंगाई बढ़ जाती है और सस्ता हुआ तो राहत मिलती है। लेकिन जरा सोचिए, अगर पेट्रोल की जगह बड़े पैमाने पर एथेनॉल का इस्तेमाल होने लगे तो देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा भारतीय खेतों से ही पूरा होने लगेगा।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!