बिहार
2 घंटे पहले
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विचारों
रसायन मुक्त खेती की दिशा में सरकार का बड़ा कदम
भारतीय कृषि में फसलों को कीटों और रोगों से बचाना हमेशा से ही एक बड़ी चुनौती रहा है। अक्सर किसान अपनी खरीफ और रबी फसलों को सुरक्षित रखने के लिए महंगे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भर रहते हैं। इससे न केवल उनकी खेती की लागत बढ़ जाती है, बल्कि पर्यावरण और मिट्टी की सेहत को भी भारी नुकसान पहुंचता है। इसी गंभीर समस्या का समाधान करने के लिए कृषि विभाग के पौध संरक्षण संभाग ने एक नई पहल की शुरुआत की है। इस योजना के माध्यम से किसानों को जैविक तरीके से कीटों पर नियंत्रण पाने के लिए विशेष उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उनकी रासायनिक दवाओं और बाजार पर निर्भरता कम होगी।
यह विशेष पहल प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत चलाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना और खेतों में रासायनिक दवाओं के अंधाधुंध छिड़काव को रोकना है। सरकार का मानना है कि यदि किसान पारंपरिक रसायनों की जगह इन जैविक उपकरणों का उपयोग करेंगे, तो पर्यावरण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा।
जैविक उपकरणों पर मिलेगी 75 प्रतिशत की भारी छूट
पौध संरक्षण संभाग की इस नई योजना के तहत किसानों को जैविक कीट नियंत्रण उपकरणों की खरीद पर पूरे 75 प्रतिशत का भारी अनुदान दिया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि किसानों को इन उपकरणों को खरीदने के लिए अपनी जेब से नाममात्र का खर्च करना होगा और शेष बड़ी राशि सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में वहन की जाएगी। इस सब्सिडी योजना के लागू होने से किसानों के कीटनाशकों पर होने वाले भारी-भरकम खर्च में बड़ी कटौती आने की उम्मीद है।
इस योजना के अंतर्गत किसानों को मुख्य रूप से चार प्रकार के अत्यंत प्रभावी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इन उपकरणों में शामिल हैं:
- फेरोमोन ट्रैप: यह फसलों में हानिकारक नर कीटों को आकर्षित कर उन्हें नष्ट करने में मदद करता है, जिससे कीटों का प्रजनन चक्र टूट जाता है।
- लाइट ट्रैप: रात के समय सक्रिय होने वाले कीटों को प्रकाश की तरफ आकर्षित कर इस उपकरण की मदद से आसानी से पकड़ा जा सकता है।
- येलो स्टिकी ट्रैप: पीले रंग की यह चिपचिपी पट्टी उड़ने वाले हानिकारक कीटों, विशेषकर रस चूसने वाले कीड़ों को अपनी ओर खींचकर चिपका लेती है।
- ब्लू स्टिकी ट्रैप: नीले रंग की यह चिपचिपी पट्टी थ्रिप्स जैसे विशिष्ट कीटों को नियंत्रित करने के लिए बेहद कारगर मानी जाती है।
ये सभी उपकरण न केवल खेतों में मौजूद हानिकारक कीटों को नियंत्रित करते हैं, बल्कि किसानों को इस बात की निगरानी करने में भी सक्षम बनाते हैं कि उनके खेत में किस प्रकार के कीटों का हमला हो रहा है, ताकि वे समय रहते उचित सुरक्षात्मक कदम उठा सकें।
बेगूसराय जिले के लिए तय हुआ 4,572 एकड़ का लक्ष्य
बेगूसराय पौध संरक्षण संभाग की निदेशक रीमा कुमारी ने इस योजना के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि खरीफ और रबी दोनों ही मुख्य कृषि सीजन में फसलों पर विभिन्न तरह के रोगों और कीड़ों का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। किसानों को रासायनिक दवाओं के जाल से बाहर निकालने के लिए इस योजना को जमीनी स्तर पर तेजी से लागू किया जा रहा है।
निदेशक के अनुसार, बेगूसराय जिले के लिए खरीफ और रबी दोनों मौसमों को मिलाकर कुल 4,572 एकड़ क्षेत्र का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभाग का पूरा प्रयास है कि इस निर्धारित लक्ष्य के तहत अधिक से अधिक किसानों को योजना के दायरे में लाया जाए, ताकि जिले के बड़े हिस्से में जैविक कीट नियंत्रण तकनीकों का प्रसार हो सके। इससे न केवल पर्यावरण की सुरक्षा होगी, बल्कि कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार देखा जा सकेगा।
इन फसलों के प्रमुख कीटों पर होगा सीधा प्रहार
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, फसलों में लगने वाले कुछ विशेष कीट फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। सरकार की इस योजना के तहत मुख्य रूप से उन कीटों के नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित किया गया है जो फसलों की उपज को नष्ट कर देते हैं। इस योजना की मदद से किसान निम्नलिखित हानिकारक कीटों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकेंगे:
- विभिन्न दालों और फसलों में लगने वाला फली छेदक कीट।
- बैंगन की फसल को बर्बाद करने वाला तना एवं फल छेदक कीट।
- मक्के की फसल का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाने वाला फॉल आर्मीवॉर्म कीट।
- टमाटर की फसल की पत्तियों को नष्ट करने वाला लीफ माइनर कीट।
- पत्तागोभी और फूलगोभी जैसी गोभी वर्गीय सब्जियों को भारी नुकसान पहुंचाने वाला डायमंड बैक मॉथ कीट।
इन सभी खतरनाक कीटों की समय पर पहचान और नियंत्रण जैविक उपकरणों की मदद से बिना किसी रासायनिक दुष्प्रभाव के बहुत ही आसान तरीके से किया जा सकेगा।
योजना की पात्रता और आवेदन की सरल प्रक्रिया
इस जनकल्याणकारी योजना का लाभ उठाने के लिए कृषि विभाग ने पात्रता और सीमाओं के संबंध में कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। योजना के नियमों के अनुसार, प्रत्येक कृषि सीजन (खरीफ या रबी) में एक किसान को अधिकतम 5 एकड़ भूमि के लिए ही सहायता और अनुदान का लाभ दिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि योजना का लाभ समाज के छोटे और सीमांत किसानों तक भी निष्पक्ष रूप से पहुंच सके।
जो भी किसान इस योजना का लाभ उठाने के इच्छुक हैं, वे अपने जिले के संबंधित पौध संरक्षण संभाग के कार्यालय से सीधे संपर्क स्थापित कर सकते हैं। वहां से योजना की पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद आवेदन की प्रक्रिया को पूरा किया जा सकता है। कृषि विभाग का दृढ़ विश्वास है कि इस प्रकार की जैविक तकनीकों को अपनाने से हमारी खेती अधिक टिकाऊ बनेगी, उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होगा और किसानों की आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी।
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