बिहार
2 घंटे पहले
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विचारों
बरसात में बढ़ जाती है मधुमक्खी पालकों की मुश्किलें
भारत में खेती और पशुपालन के साथ मधुमक्खी पालन का व्यवसाय भी बहुत पुराना और महत्वपूर्ण है। जैसे-जैसे समय बदला है, इन व्यवसायों को करने के तरीकों में आधुनिक तकनीक का समावेश हुआ है। आज कई प्रकार की मशीनों का उपयोग करके मधुमक्खी पालन को सुगम बनाया जा रहा है, लेकिन प्रकृति के अपने नियम हैं। वर्तमान में बरसात का मौसम चल रहा है। यह मौसम न केवल इंसानों के लिए कई प्रकार की समस्याएं लेकर आता है, बल्कि पशुओं और कीटों के लिए भी चुनौतीपूर्ण साबित होता है। विशेष रूप से जो लोग मधुमक्खी पालन का व्यवसाय कर रहे हैं, उन्हें इस दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, मधुमक्खी पालकों की समस्याओं के पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन इस मौसम में कुछ समस्याएं अचानक से सिर उठाकर सामने आ जाती हैं, जो सीधा नुकसान पहुँचाती हैं।
मधुमक्खियों के दुश्मन और सुरक्षा की चुनौती
बरसात के दिनों में मधुमक्खी पालकों के सामने अनेक चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। इन दिनों मधुमक्खियों को सांप, छिपकली, गिरगिट और विभिन्न प्रकार के रेंगने वाले जीवों से सुरक्षित रखना एक कठिन कार्य होता है। इसके अलावा, यदि खेतों में पानी भर जाए, तो मधुमक्खी के बक्सों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना प्राथमिक आवश्यकता बन जाती है। इन सब खतरों के बीच, सबसे घातक दुश्मन लाल चींटी मानी जाती है। यह चींटी किसी विशेष जमीन से अचानक भारी तादाद में निकलती है और देखते ही देखते मधुमक्खियों के लिए काल बन जाती है।
लाल चींटियों का आतंक: एक घंटे में खत्म होता है सब
जहानाबाद जिले के काको प्रखंड के नदियांवा गांव के निवासी संतोष केसरी, जो पिछले 10 साल से मधुमक्खी पालन से जुड़े हैं, बताते हैं कि हर मौसम में मधुमक्खी पालन चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन मानसून का समय सबसे अधिक कष्टदायक साबित होता है। इस मौसम में मधुमक्खियों के सभी शत्रु सक्रिय हो जाते हैं। जब किसान पानी और रेंगने वाले जीवों से बक्सों को बचा लेते हैं, तब उन्हें लाल चींटियों के हमले का डर सताता है। संतोष केसरी के अनुसार, लाल चींटी एक ऐसी समस्या है जो किसी भी समय जमीन के नीचे से लाखों की संख्या में बाहर आ सकती है। यदि ये चींटियां बक्से के अंदर प्रवेश कर जाएं, तो महज 1 घंटे के भीतर वे बक्से में मौजूद 10 हजार मधुमक्खियों को पूरी तरह गायब कर देती हैं। इससे पालकों को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ता है। पिछले साल बक्से रखने वाली जगह पर जलस्तर अचानक बढ़ गया था, तब उन्होंने 10 घंटे की मशक्कत के बाद 400 बक्सों को सुरक्षित ऊंचाई वाले स्थानों पर पहुंचाया था। इस दौरान उन्हें मधुमक्खियों के डंक भी सहने पड़े, लेकिन अपने काम के प्रति समर्पण के कारण उन्होंने यह कार्य जारी रखा।
लाल चींटी से सुरक्षा के कारगर उपाय
मधुमक्खी के बक्सों को इन लाल चींटियों से सुरक्षित रखने के लिए भौतिक अवरोध यानी फिजिकल बैरियर बनाना सबसे उत्तम विकल्प है। इसके लिए कुछ सरल तरीके अपनाए जा सकते हैं:
- स्टैंड का प्रयोग: सबसे पहले मधुमक्खी के बक्सों को जमीन पर रखने के बजाय एक स्टैंड के ऊपर रखें।
- पानी और तेल का घेरा: स्टैंड के चारों पैरों को पानी से भरे छोटे डिब्बों या बर्तनों में डुबा दें। इस पानी में थोड़ा सा तेल डाल देना चाहिए, जिससे चींटियां उसे पार नहीं कर पाती हैं।
- ग्रीस या वैसलीन: यदि पानी का उपयोग करना संभव नहीं है, तो स्टैंड के पैरों पर अच्छी तरह ग्रीस या वैसलीन लगा दें। इनकी फिसलन भरी सतह पर चींटियां नहीं चल पाती हैं।
- दालचीनी का पाउडर: एक और घरेलू उपाय के रूप में, आप बक्से के चारों ओर दालचीनी का पाउडर छिड़क सकते हैं। इसकी तेज गंध लाल चींटियों को बिल्कुल पसंद नहीं आती, जिससे वे बक्सों के पास नहीं फटकतीं।
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