एयरपोर्ट पर 'सिग्नेचर चोर' के नारों के बीच भवानी भवन पहुंचे अभिषेक बनर्जी, सीआईडी कर रही तीखी पूछताछ
पश्चिम बंगाल
2 मिनट पहले
4
विचारों
पश्चिम बंगाल की सियासत इन दिनों उबाल पर है और इसका केंद्र बना हुआ है कोलकाता के अलीपुर इलाके में स्थित सीआईडी मुख्यालय भवानी भवन। कलकत्ता हाईकोर्ट के कड़े आदेश के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी आखिरकार भारी ड्रामे के बीच सीआईडी दफ्तर पहुंच ही गए, जहां अधिकारियों ने उनसे पूछताछ शुरू कर दी है।
इससे पहले तीन समन को बीमारी और दिल्ली दौरे का हवाला देकर टालने वाले अभिषेक बनर्जी को अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि उन्हें शाम 6 बजे से पहले हर हाल में सीआईडी के सामने हाजिर होना है। इसी आदेश का पालन करते हुए वे करीब 5 बजकर 50 मिनट पर, यानी तय समय सीमा से ठीक 10 मिनट पहले भवानी भवन के भीतर दाखिल हुए।
एयरपोर्ट पर हाई-वोल्टेज ड्रामा
भवानी भवन पहुंचने से पहले कोलकाता एयरपोर्ट पर जो नजारा दिखा, उसने बंगाल की कानून-व्यवस्था और टीएमसी के भीतर की कलह को सड़क तक ला खड़ा किया। अभिषेक बनर्जी पिछले तीन दिनों से दिल्ली में थे, जहां वे विपक्षी गठबंधन की बैठकों में शामिल हो रहे थे। शाम करीब 4:30 बजे जैसे ही उनका विमान कोलकाता हवाई अड्डे पर उतरा, पहले से जमे प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ ने उन्हें घेर लिया।
प्रदर्शनकारियों ने उन्हें देखते ही 'सिग्नेचर चोर-सिग्नेचर चोर' के नारे लगाने शुरू कर दिए। सीआईएसएफ और स्थानीय पुलिस के कड़े सुरक्षा घेरे के बावजूद भीड़ अभिषेक के बेहद करीब पहुंच गई और वहां जमकर धक्कामुक्की हुई। किसी तरह सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सुरक्षित गाड़ी में बैठाया। इसके बाद वे कुछ देर के लिए कालीघाट स्थित अपने आवास गए और फिर सीधे सीआईडी दफ्तर के लिए रवाना हो गए।
क्या आज होगी गिरफ्तारी?
इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सीआईडी आज अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तार कर लेगी? इसका जवाब कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले में छिपा है, जो उन्हें पूछताछ से महज कुछ घंटे पहले मिला।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, अदालत ने अभिषेक बनर्जी को एक बड़ी अंतरिम राहत दी है और सीआईडी को निर्देश दिया है कि जांच के दौरान उनके खिलाफ कोई कड़ा दंडात्मक कदम न उठाया जाए। हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया है कि उन्हें जांच में पूरी तरह सहयोग करना होगा। यानी कानूनी रूप से आज उनकी गिरफ्तारी संभव नहीं है, लेकिन सीआईडी के तीखे सवालों से पार पाना उनके लिए आसान नहीं रहने वाला।
आखिर क्या है हस्ताक्षर धोखाधड़ी का मामला?
यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और मुख्य सचेतक के चयन से जुड़ा है। टीएमसी के ही दो विधायकों रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने स्पीकर से शिकायत की थी कि अभिषेक बनर्जी ने 20 मई को एक पत्र सौंपा था, जिसमें शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने के लिए करीब 70 विधायकों के समर्थन का दावा किया गया था।
शिकायतकर्ता विधायकों का आरोप है कि इस पत्र में कम से कम 12 विधायकों के हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी हैं और बिना उनकी सहमति के किए गए हैं। इसके बाद यह मामला सीआईडी के पास पहुंचा। सीआईडी अब तक 13 विधायकों के बयान वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ दर्ज कर चुकी है, जिन्होंने साफ कहा है कि उनके दस्तखत जाली हैं।
टीएमसी में बढ़ती बगावत
राजनीतिक हलकों में इसे टीएमसी के भीतर अब तक की सबसे बड़ी अंदरूनी बगावत माना जा रहा है। पार्टी के 58 से अधिक विधायक अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ खुलकर सामने आ चुके हैं, जिससे टीएमसी दो गुटों में बंटती नजर आ रही है।
जमीनी हालात बता रहे हैं कि भले ही अदालत ने फिलहाल उन्हें जेल जाने से बचा लिया हो, लेकिन जनता के बीच और खुद उनकी पार्टी के भीतर उनके खिलाफ बना माहौल उनके राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है। भवानी भवन के बंद कमरे में चल रही यह पूछताछ केवल एक कानूनी प्रक्रिया भर नहीं, बल्कि बंगाल की आने वाली सियासत की दिशा तय करने वाला मोड़ भी बन सकती है।
Comments
0 comment