कानून के छात्रों पर BCI का नियंत्रण नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने NALSAR मामले में सुनाया बड़ा फैसला राष्ट्रीय राजनीति 3 घंटे पहले 7
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) को कानून की पढ़ाई करने वाले छात्रों के अनुशासन या आचरण को नियंत्रित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की BCI को दो टूक

देश की सर्वोच्च अदालत ने भारतीय विधिज्ञ परिषद यानी BCI के अधिकारों के दायरे को लेकर एक महत्वपूर्ण और सख्त टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि कानून की शिक्षा ले रहे विद्यार्थियों के व्यवहार या उनके आचरण पर नियंत्रण रखने या उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई वैधानिक हक BCI के पास नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह का कदम उठाना पूरी तरह से संबंधित विश्वविद्यालय या शिक्षण संस्थान का अधिकार क्षेत्र है। संस्थान अपने नियमों और विनियमों के दायरे में रहकर ही इस पर कोई फैसला ले सकता है।

क्या था नालसार विश्वविद्यालय से जुड़ा पूरा विवाद

यह मामला हैदराबाद स्थित नालसार विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाने से जुड़ा है। दरअसल, छात्रों ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में प्रधान न्यायाधीश के आने का विरोध किया था। इस घटनाक्रम के बाद BCI ने सख्त रुख अपनाते हुए कुछ अधिसूचनाएं जारी कर दी थीं। हालांकि, बाद में भारी आलोचनाओं के बीच BCI को अपनी ये अधिसूचनाएं वापस लेनी पड़ीं। इस पूरे घटनाक्रम पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने BCI की इन दोनों अधिसूचनाओं को पूरी तरह से रद्द कर दिया है।

छात्रों के पंजीकरण पर BCI के दखल पर नाराजगी

विवाद की शुरुआत 14 अगस्त को हुई थी। उस समय BCI ने राज्य बार परिषदों को निर्देश दिया था कि अगले आदेश तक नालसार के 2026 बैच के स्नातकों का वकील के तौर पर पंजीकरण न किया जाए। यह निर्देश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के प्रस्तावित दौरे के विरोध में चलाए गए अभियान के बाद आया था। जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो प्रधान न्यायाधीश ने BCI के इस हस्तक्षेप पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यह छात्रों और उनके बीच का आपसी संवाद है, इसमें BCI का दखल देना पूरी तरह से अनावश्यक है और उनके पास ऐसा करने का कोई आधार नहीं है।

नियामकीय नियंत्रण की सीमाएं

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि जब तक कोई विद्यार्थी अपनी कानून की पढ़ाई पूरी नहीं कर लेता और अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत नहीं हो जाता, तब तक वह कानूनी पेशे के वैधानिक ढांचे के अंतर्गत नहीं आता है। इसलिए इस दौरान उन पर BCI का कोई नियामकीय नियंत्रण नहीं हो सकता। अदालत ने यह संदेश दे दिया है कि शिक्षण संस्थानों में अनुशासन बनाए रखना वहां के प्रशासन का कार्य है, और बाहरी संस्थाओं द्वारा इसमें हस्तक्षेप करना नियमों के प्रतिकूल है। इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में शिक्षण संस्थानों के आंतरिक मामलों में BCI की मनमानी नहीं चलेगी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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