उत्तराखंड
3 घंटे पहले
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विचारों
कुमाऊं की खास पहचान
पहाड़ी क्षेत्रों की संस्कृति और वहां के खान-पान की अपनी अलग ही विशेषता है। कुमाऊं क्षेत्र की बात करें तो वहां की एक मिठाई इन दिनों काफी चर्चा में है, जिसे सिंगोड़ी के नाम से जाना जाता है। अल्मोड़ा और उसके आसपास के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोग इस मिठाई के स्वाद के दीवाने हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसे बनाने का तरीका और इसे परोसने का खास अंदाज है।
कैसे तैयार होती है सिंगोड़ी?
सिंगोड़ी का स्वाद मुख्य रूप से गाढ़े खोये पर निर्भर करता है। इसे तैयार करने के लिए खोये में नारियल और इलायची का मिश्रण मिलाया जाता है, जो इसे बेहद स्वादिष्ट और सुगंधित बनाता है। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण चरण इसे लपेटने का है। जब मिश्रण तैयार हो जाता है, तो इसे शंकु के आकार में मालू के पत्ते में लपेटा जाता है। यही वह पत्ता है जो इस मिठाई को बाकी तमाम मिठाइयों से बिल्कुल अलग और खास बनाता है।
राजा-महाराजाओं का स्वाद
बागेश्वर की रहने वाली व्यापारी सुनीता भट्ट बताती हैं कि सिंगोड़ी केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि परंपरा का हिस्सा है। मालू के पत्तों की अपनी एक प्राकृतिक खुशबू होती है, जो मिठाई में समाकर उसे एक अलग स्तर का स्वाद प्रदान करती है। अपनी इन्ही खूबियों के कारण यह मिठाई पुराने समय में राजा-महाराजाओं की पसंदीदा हुआ करती थी। आज भी पहाड़ों में जाने वाले पर्यटक इस खास मिठाई का आनंद लेना नहीं भूलते।
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